पंत छात्रावास में इविवि प्रशासन की रेड, छात्रों ने किया जम कर विरोध

AU administration raids Pant Hostel; students stage strong protest.

एक सप्ताह पहले भी दिया जा चुका है नोटिस
मरम्मत के नाम पर छात्रों को किया जा रहा बेदखल
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध पंत छात्रावास में शनिवार को विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने छात्रावास के कमरों में अवैध रूप रह रहे छात्रों के कब्जे से कमरों को मुक्त कराने और छात्रावास खाली कराने के उद्देश्य से कार्रवाई की। इस दौरान छात्रावास परिसर में छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। छात्र कार्रवाई का विरोध करते रहे, जबकि प्रशासन का कहना है कि छात्रावास की जर्जर स्थिति को देखते हुए किसी भी बड़ी दुर्घटना से पहले इसे खाली कराना आवश्यक है। इस छात्रावास में कुल 83 कमरें है।

विरोध प्रदर्शन करते छात्र

 

 

 

 

 

 

बिना वैकल्पिक व्यावस्था के खाली करा रहे छात्रावास
हालांकि, छात्र प्रशासन की इस दलील से सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है कि मरम्मत के नाम पर उन्हें छात्रावास से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि यदि वास्तव में भवन की मरम्मत करानी है तो पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। बिना किसी विकल्प के छात्रावास खाली कराने का निर्णय उनके भविष्य और पढ़ाई पर सीधा असर डालेगा। छात्रों ने यह भी बताया कि पंत छात्रावास में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के वे विद्यार्थी रहते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कई छात्रों का सिविल सेवा मुख्य परीक्षा निकट है। ऐसे समय में यदि उन्हें छात्रावास खाली करना पड़ा तो न केवल रहने की समस्या खड़ी होगी, बल्कि उनकी तैयारी भी प्रभावित होगी। छात्रों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले अधिकांश विद्यार्थियों के लिए अचानक नया आवास ढूंढ़ना आसान नहीं है।
एक सप्ताह पहले दिया था नोटिस
इस पर इलाहाबाद विश्वविद्यालया डीएसडब्ल्यू डॉ.सूर्यभान ने बताया कि इससे पहले भी छात्रावास में रह रहे छात्रों को कई बार नोटिस दिया गया था कि छात्रावास खाली कर दे, मगर छात्र नहीं माने। इसके बावजूद एक सप्ताह पहले उन्हें हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया, जिस पर छात्रों ने एक सप्ताह का समय मांगा जो कि शनिवार को पूरा हो चुका है। जब छात्र नहीं माने तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस बल का सहयोग लिया। छात्रावास में रह रहे छात्रों को छात्रावास खाली करने के लिए कोई अगली तारीख नहीं दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों के अनुसार अवैध रूप से रह रहे छात्रों पर कार्यवाही करेगा। इस पर छात्रों का कहना है कि छात्रावास का आवंटन दो वर्षों के लिए किया जाता है और अंतिम बार वर्ष 2024 में कमरों का आवंटन हुआ था। उनका दावा है कि आवंटन अवधि और वर्तमान कार्रवाई को लेकर भी कई तरह की अस्पष्टताएं हैं, जिन्हें पहले दूर किया जाना चाहिए।
छात्रों के जीवन संग खिलवाड़ नहीं किया जा सकता
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य कुलानुशासक (चीफ प्रॉक्टर) डॉ. अतुल नारायण सिंह ने बताया कि जिन छात्रों को छात्रावास आवंटित किया गया था, उनकी निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है। नियमानुसार उन्हें स्वयं ही छात्रावास खाली कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भवन की जर्जर स्थिति और बिजली से जुड़े खतरे को देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठा सकता। यदि समय रहते भवन खाली नहीं कराया गया और कोई हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय पर आएगी। फिलहाल छात्रावास खाली कराने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर प्रशासन सुरक्षा और मरम्मत का हवाला दे रहा है, तो दूसरी ओर छात्र इसे अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध पर अड़े हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय इस विवाद का समाधान किस तरह निकालता है, ताकि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और जर्जर भवन से संभावित दुर्घटना का खतरा भी टल सके।

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी

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