
Monsoon Session 2026 : संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 राज्यसभा से भी ध्वनिमत से पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में मंजूरी प्राप्त कर चुका था। करीब आठ घंटे तक चली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के खड़े होते ही विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग की। मांग पूरी न होने पर विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के बाहर जाने के बाद नेता सदन जे.पी. नड्डा ने कहा कि चर्चा में भाग लेने के बाद जवाब सुने बिना सदन छोड़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को लेकर भी जोरदार विवाद हुआ। सत्ता पक्ष की आपत्ति के बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से रिकॉर्ड से हटाने (एक्सपंज) का निर्देश दिया। खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए आरोप लगाया कि केवल कड़े कानून बनाने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी।
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस
उधर, लोकसभा में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के लिए असंसदीय और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया तथा सदन में निराधार आरोप लगाए। भाजपा ने राहुल गांधी से बिना शर्त माफी की भी मांग की है।
दिनभर संसद में हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित
गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में छात्र आंदोलन, पेपर लीक, पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा होता रहा। कई बार कार्यवाही बाधित हुई और बाद में राज्यसभा की कार्यवाही 31 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि विरोध और शोर-शराबे के बीच सरकार एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित कराने में सफल रही। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा।



