
Anant Singh: बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चा में हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। याचिका पर अदालत का रुख अनंत सिंह के लिए अहम हो सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट उनकी जमानत रद्द करता है, तो उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, सुनवाई से पहले इस बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनंत सिंह की जमानत को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने उनकी जमानत रद्द कर उन्हें फिर से जेल भेजने की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में यह तीसरी सुनवाई है।
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में दुलारचंद यादव की मौत से जुड़ा है। इस मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया था और बाद में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए थे।
JDU से निष्कासन के बाद राजनीतिक मुश्किलें
अनंत सिंह इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) से टकराव के कारण भी सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एमएलसी चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करने और जनसुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार का समर्थन करने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।
बताया गया है कि जेडीयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर भी विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनंत सिंह को मिला राज्य मंत्री का दर्जा समाप्त कर दिया गया है और उनके नाम पर आवंटित वन पोलो रोड स्थित आवास खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
इस तरह अनंत सिंह के सामने एक ओर जमानत से जुड़ी कानूनी चुनौती है, तो दूसरी ओर पार्टी से निष्कासन के बाद राजनीतिक स्थिति भी बदल गई है।
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर
‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। उसी वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भी वह विजयी रहे। इसके बाद 2010 में भी उन्होंने जीत हासिल की।
नीतीश कुमार से राजनीतिक मतभेद होने के बाद अनंत सिंह ने 2015 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा और जीत दर्ज की। वर्ष 2020 में वह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2025 में जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़कर फिर जीतने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
अनंत सिंह के जेल में रहने के दौरान उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस घटनाक्रम ने भी मोकामा की राजनीति में उनके परिवार की भूमिका को चर्चा में रखा।
पुटुस यादव हत्याकांड के बाद शुरू हुआ जेल जाने का सिलसिला
अनंत सिंह के जेल जाने का सिलसिला वर्ष 2015 में पुटुस यादव हत्याकांड से जुड़े मामले के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2015 में गिरफ्तारी के बाद वह मार्च 2016 तक जेल में रहे। इसके बाद पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी।
अगस्त 2019 में उनके पैतृक गांव लाडमा स्थित घर से एके-47 राइफल, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया। इसके बाद अनंत सिंह ने दिल्ली की साकेत अदालत में आत्मसमर्पण किया था।
इस मामले में जून 2022 में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें इस मामले से बरी कर दिया। इसके बाद 16 अगस्त 2024 को वह जेल से बाहर आए।
नौरंगा-जालालपुर गोलीबारी मामले में भी हुई गिरफ्तारी
वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव से पहले मोकामा के नौरंगा-जालालपुर इलाके में हुई गोलीबारी के मामले में भी अनंत सिंह का नाम सामने आया था। इस मामले में उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए। इस प्रकरण के बाद दुलारचंद यादव की मौत से जुड़ा मामला सामने आया, जिसने उनकी कानूनी मुश्किलों को फिर बढ़ा दिया।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में कैसे मिली थी जमानत?
अक्टूबर 2025 में मोकामा में दुलारचंद यादव की मौत के मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल भेजा गया।
करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी। रिपोर्ट के अनुसार, वह 23 मार्च 2026 को जेल से बाहर आए थे।
अब इसी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता नीरज कुमार ने अदालत से जमानत रद्द करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान इस याचिका पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह पर टिकी नजरें
अनंत सिंह से जुड़ा मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब वह जेडीयू से निष्कासन के बाद राजनीतिक चर्चा में हैं। एक तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी की कार्रवाई और विधानसभा सदस्यता से जुड़ा घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, अनंत सिंह की जमानत रद्द होगी या बरकरार रहेगी, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा। केवल सुनवाई होने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें निश्चित रूप से फिर जेल जाना पड़ेगा।
written by Siddhi Srivastava



