
Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा उपचार के लिए तीन सप्ताह तक विदेश यात्रा करने की अनुमति दी। अदालत के फैसले के बाद अब अभिषेक बनर्जी सितंबर में अपनी आंख के इलाज के लिए विदेश जा सकेंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विदेश यात्रा और अपनी पसंद के चिकित्सा उपचार का अधिकार महत्वपूर्ण माना। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कहां जाना है और कौन सा उपचार लेना है, यह तय करना उसका अधिकार है। हालांकि, विदेश जाने की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं।
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को अपनी विदेश यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसमें यात्रा का पूरा कार्यक्रम, उड़ानों की जानकारी, विदेश में ठहरने की जगह और इलाज करने वाले डॉक्टरों तथा अस्पताल का पूरा विवरण शामिल है। यानी अनुमति मिलने के बावजूद उनकी यात्रा और इलाज से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी।
अभिषेक बनर्जी की आंख की समस्या पुरानी है। 2016 में हुई एक सड़क दुर्घटना में उनकी आंख में चोट लगी थी। इसी चोट के इलाज के लिए वह विदेश में चिकित्सा सुविधा लेने की अनुमति मांग रहे थे। अब सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद उनके लिए विदेश जाकर उपचार कराने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवाद भी शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेताओं ने आशंका जताई है कि चिकित्सा उपचार के नाम पर विदेश जाने के बाद अभिषेक बनर्जी देश से बाहर रह सकते हैं।
पश्चिम बंगाल की मंत्री और बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी अपनी चिकित्सा स्थिति का इस्तेमाल देश छोड़ने के बहाने के तौर पर कर सकते हैं। अग्निमित्रा पॉल ने यह भी कहा कि अगर उन्हें इलाज की जरूरत है तो राज्य के सरकारी अस्पतालों में उनके लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
हालांकि, यह बीजेपी नेताओं के आरोप हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ऐसी किसी आशंका को आधार बनाकर विदेश यात्रा पर रोक नहीं लगाई गई है। अदालत ने इसके बजाय यात्रा और इलाज से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की शर्त रखी है।
बीजेपी की ओर से अभिषेक बनर्जी के विदेश दौरे को लेकर एक और सवाल उनके पास मौजूद राजनयिक पासपोर्ट को लेकर उठाया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता भारतीय कानून से बचने के लिए अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
उनका दावा है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे देश में चला जाता है, जिसके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है, तो उसे वापस लाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, यह भी राजनीतिक आरोप है और अभिषेक बनर्जी के विदेश जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने इलाज के लिए निर्धारित अवधि और यात्रा विवरण से जुड़ी शर्तें तय की हैं।
अभिषेक बनर्जी से जुड़ा यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित धमकी भरे बयान को लेकर उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी मामले की पृष्ठभूमि में बीजेपी नेताओं की ओर से उनके विदेश जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चिकित्सा उपचार के लिए विदेश यात्रा के अधिकार को महत्व दिया। अदालत का रुख यह रहा कि किसी व्यक्ति को अपने इलाज के लिए अपनी पसंद की चिकित्सा सुविधा चुनने का अधिकार है। इसी आधार पर अभिषेक बनर्जी को तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी गई।
अब इस पूरे मामले में दो पहलू सामने हैं। एक तरफ अभिषेक बनर्जी के लिए आंखों के इलाज का रास्ता साफ हो गया है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस फैसले को लेकर राजनीतिक सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में विदेश यात्रा, इलाज और उनसे जुड़े कानूनी मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी सितंबर में तीन सप्ताह के लिए विदेश जाकर अपनी आंख का उपचार करा सकेंगे। अदालत की शर्तों के मुताबिक उन्हें यात्रा, ठहरने और इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि उनका विदेश दौरा कब और किस देश में होता है और इलाज के बाद उनकी वापसी को लेकर आगे क्या स्थिति सामने आती है।


