
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसी मामले में चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि लंबित अपीलों के आधार पर चुनाव परिणामों को प्रभावित मान लेना सही नहीं होगा।
आयोग ने यह जवाब तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद डेरेक ओ’ब्रायन की उस याचिका पर दिया है, जिसमें 31 विधानसभा सीटों पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि कई सीटों पर जीत का अंतर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या से कम था।
आयोग ने TMC की सीटों का भी दिया उदाहरण
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केवल उन सीटों का जिक्र किया जा रहा है, जहां TMC को हार का सामना करना पड़ा। आयोग के मुताबिक, ऐसी 21 सीटें भी हैं जहां तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की और वहां भी हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी।
आयोग का कहना है कि यदि इसी तर्क को स्वीकार किया जाए, तो उन सीटों के नतीजों पर भी सवाल उठेंगे जहां TMC विजयी रही थी।
37 लाख से ज्यादा अपीलें अब भी लंबित
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि SIR ट्रिब्यूनलों के सामने कुल 38 लाख से अधिक अपीलें दाखिल हुई थीं। इनमें से बड़ी संख्या अब भी लंबित है।
आयोग के अनुसार, लगभग 22 लाख अपीलें उन लोगों की हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जबकि करीब 16 लाख अपीलें ऐसे लोगों की हैं जिन्होंने नए नाम जोड़ने का विरोध किया है। आयोग का दावा है कि इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चुनाव परिणाम प्रभावित हुए।
हटाए गए नामों को लेकर क्या बोला आयोग?
चुनाव आयोग ने कहा कि SIR के दौरान हटाए गए अधिकांश नाम मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित या लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं से जुड़े थे। आयोग के मुताबिक, 1.22 करोड़ नाम हटाए जाने की चर्चा तो होती है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि बड़ी संख्या में नाम तकनीकी और वैधानिक कारणों से हटाए गए थे।
आयोग ने यह भी जानकारी दी कि सबसे अधिक अपीलें मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों से प्राप्त हुई हैं।
लंबित मामलों के निपटारे की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में आयोग ने बताया कि लंबित अपीलों के तेजी से निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सुझाव दिया गया है कि राज्य की 42 लोकसभा सीटों के अनुरूप 42 अपील ट्रिब्यूनल बनाए जाएं।
इसके अलावा आयोग ने कहा कि तकनीक की मदद से पूर्व न्यायाधीश घर से भी अपीलों की सुनवाई कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज होगी।
दोबारा चुनाव की मांग को बताया असंवैधानिक
चुनाव आयोग ने 31 सीटों पर दोबारा चुनाव कराने की मांग को संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है। आयोग ने कहा कि किसी निर्वाचन परिणाम को चुनौती देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 329(b) के तहत हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने का प्रावधान है।
आयोग के अनुसार, सीधे सुप्रीम कोर्ट से चुनाव रद्द करने या पुनर्मतदान की मांग करना संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
क्या है पूरा विवाद?
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जबकि चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि कार्रवाई नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर की गई।
अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग के जवाब के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
written by Siddhi Srivastava



