Stock Market Rally: शेयर बाजार में तूफानी तेजी, एक घंटे में निवेशकों की संपत्ति 7.47 लाख करोड़ रुपये बढ़ी

Stock Market Rally: सेंसेक्स 1,400 अंक से ज्यादा चढ़ा, निफ्टी 24,350 के पार; कच्चे तेल की गिरती कीमतों और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

Stock Market Rally: दिवाली से पहले भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उछाल आया। बाजार की इस तेजी का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी दिखाई दिया। महज एक घंटे के भीतर BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 7.47 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया।

सुबह करीब 10:15 बजे सेंसेक्स 1,400 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 78,735.79 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 में करीब 431 अंकों का उछाल आया और यह 24,389.55 पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई।

इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

एक घंटे में 7.47 लाख करोड़ रुपये कैसे बढ़ी निवेशकों की संपत्ति?

गुरुवार को बाजार खुलने के समय BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 4,93,44,359 करोड़ रुपये था। कारोबार शुरू होने के लगभग एक घंटे बाद यह बढ़कर 5,00,91,168 करोड़ रुपये पहुंच गया।

इस तरह बाजार पूंजीकरण में करीब 7,46,809 करोड़ रुपये यानी लगभग 7.47 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शेयरों की कीमतों में तेजी आने से कंपनियों का बाजार मूल्य बढ़ा और इसका असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा।

हालांकि, मार्केट कैप में हुई यह बढ़ोतरी सभी निवेशकों के खाते में सीधे जमा हुई रकम नहीं है। यह बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्य में आया बदलाव है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिली राहत

शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना रही। पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 8.7 प्रतिशत गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई थी। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड का भाव भी घटकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ता है। इसका असर रुपये की कीमत, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है।

इसके उलट, कच्चे तेल के दाम घटने से आयात खर्च और ईंधन पर निर्भर कंपनियों की लागत को राहत मिल सकती है। इसी उम्मीद के चलते निवेशकों ने बाजार में खरीदारी को प्राथमिकता दी।

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों का भी दिखा असर

अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों को भी वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी की एक वजह बताया जा रहा है। खबर के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल किया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके फैसलों पर राजनीतिक संतुलन बदलने की संभावना जताई जा रही है।

निवेशकों के बीच यह उम्मीद बनी है कि राजनीतिक समीकरण बदलने से अमेरिकी प्रशासन के लिए टैरिफ और व्यापार से जुड़े बड़े फैसले लेना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।

इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव घटने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कम हो सकती हैं।

अमेरिकी बाजारों में चुनाव नतीजों के बाद आई तेजी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। भारतीय शेयर बाजार को भी इससे समर्थन मिला।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा बाजार का भरोसा

भारतीय बाजार में तेजी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी से भी मजबूती मिली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसे अक्टूबर के बाद उनकी एक दिन की सबसे बड़ी खरीदारी बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशक लगातार चार कारोबारी सत्रों से भारतीय शेयरों में पैसा लगा रहे थे। नवंबर में अब तक उनकी कुल खरीदारी 17,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई।

इससे पहले सितंबर और अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 90,000 करोड़ रुपये की निकासी की थी। ऐसे में उनकी वापसी को बाजार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

शेयर बाजार में आई तेजी के बावजूद आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख, अमेरिका की व्यापार नीति और पश्चिम एशिया की स्थिति बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, घरेलू आर्थिक आंकड़े और रुपये की चाल भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए एक दिन की तेजी के आधार पर बाजार की आगे की दिशा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

फिलहाल, दिवाली से पहले आई इस तेजी ने निवेशकों के बाजार मूल्य में बड़ा इजाफा किया है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना अहम होगा कि बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाता है या नहीं।

written by Siddhi Srivastava

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