
US Midterm Elections 2026: अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बीच आयोजित हो रहा है और इसे उनकी नीतियों तथा लोकप्रियता के आकलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजों से राष्ट्रपति का पद या उनका मौजूदा कार्यकाल सीधे प्रभावित नहीं होगा, लेकिन अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव भी कराए जा रहे हैं। चुनाव से पहले लाखों मतदाता पोस्टल बैलेट और अर्ली वोटिंग के जरिए अपना मत दर्ज करा चुके हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार तक 5.7 करोड़ से अधिक मतदाता पहले ही वोट डाल चुके थे।
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों का क्या है गणित?
अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है। इसके दो सदन हैं—प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट। दोनों सदनों की भूमिका कानून बनाने और सरकार के कामकाज पर निगरानी रखने में अहम होती है।
प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सदस्य होते हैं। इनके चुनाव हर दो साल में कराए जाते हैं। इस बार सभी सीटों पर मतदान हो रहा है। दूसरी ओर, सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं और प्रत्येक सीनेटर का कार्यकाल छह साल का होता है। हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला है।
चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत हासिल था। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सदस्यों के बीच अंतर बेहद कम था, जबकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को 53-47 की बढ़त हासिल थी। इस चुनाव के बाद दोनों सदनों में दलों की स्थिति बदल सकती है।
मध्यावधि चुनाव के नतीजों का ट्रंप पर क्या असर होगा?
मध्यावधि चुनाव में हार या जीत से डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति पद पर बनी रहने की स्थिति सीधे नहीं बदलती। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है और मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति चुनाव से अलग होते हैं।
हालांकि, राष्ट्रपति को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस के सहयोग की जरूरत होती है। बजट, कानून और कई बड़े नीतिगत प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की भूमिका महत्वपूर्ण है।
यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए अपने प्रस्तावों को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। वहीं, यदि डेमोक्रेटिक पार्टी किसी सदन में बहुमत हासिल कर लेती है, तो सरकार के विधायी कार्यक्रम पर बातचीत और राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है।
कांग्रेस में बहुमत बदलने से क्या-क्या हो सकता है?
कांग्रेस के सदनों में विपक्षी दल का बहुमत होने पर राष्ट्रपति की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की ज्यादा जांच-पड़ताल हो सकती है। संसदीय समितियां सरकारी कामकाज पर सुनवाई कर सकती हैं और विभिन्न मुद्दों पर दस्तावेज या जवाब मांग सकती हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रपति की ओर से पेश किए जाने वाले विधेयकों को पारित कराना कठिन हो सकता है। बजट, आव्रजन, व्यापार और दूसरे नीतिगत मुद्दों पर दोनों दलों के बीच सहमति बनाना जरूरी होगा।
हालांकि, राष्ट्रपति के पास कुछ संवैधानिक अधिकार बने रहते हैं। वह कानूनों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं या वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, कांग्रेस भी निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत वीटो को पलट सकती है। इसलिए किसी एक सदन में बहुमत बदलने का अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति की सभी कार्यकारी शक्तियां समाप्त हो जाएंगी।
क्या कहता है मध्यावधि चुनावों का पुराना रिकॉर्ड?
अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में मध्यावधि चुनाव अक्सर व्हाइट हाउस में मौजूद राष्ट्रपति की पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। कई बार मतदाताओं ने राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच हुए चुनाव में विपक्षी दल को समर्थन दिया है, जिससे कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल गया।
हालांकि, हर चुनाव में ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और 2002 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की पार्टी ने मध्यावधि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था। इसलिए पुराने चुनावी रुझान मौजूदा नतीजों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करते।
सर्वेक्षणों में किस पार्टी की स्थिति कैसी है?
चुनाव से पहले जारी कई सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को कुछ राष्ट्रीय और प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में बढ़त दिखाई गई है। हालांकि, सर्वेक्षणों के नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं और वे अंतिम चुनाव परिणाम की गारंटी नहीं होते।
मतदान में हिस्सा लेने वाले मतदाताओं की संख्या, स्थानीय उम्मीदवारों की लोकप्रियता और राज्यों के अलग-अलग मुद्दे भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए वास्तविक तस्वीर वोटों की गिनती और आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
ट्रंप की नीतियों पर जनता की राय का भी होगा आकलन
इस चुनाव को राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले दो वर्षों के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। उनके प्रशासन के फैसलों में आव्रजन नीति, आयात शुल्क यानी टैरिफ, ईरान से जुड़ी नीति, इजराइल के प्रति रुख और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी रणनीति जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
इन विषयों पर मतदाताओं की राय चुनावी नतीजों में किस हद तक दिखाई देती है, यह आगे स्पष्ट होगा। इसके साथ ही महंगाई, रोजगार, ईंधन की कीमतें और रोजमर्रा के खर्च जैसे घरेलू मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले अहम राजनीतिक पड़ाव
अमेरिका में अगला राष्ट्रपति चुनाव वर्ष 2028 में होना है। ऐसे में 2026 के मध्यावधि चुनाव को दोनों प्रमुख दलों के लिए आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन नतीजों से रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। साथ ही, कांग्रेस में बनने वाला नया समीकरण ट्रंप प्रशासन के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
चुनाव परिणाम आने में लग सकता है समय
अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में मतदान केंद्रों के बंद होने का समय अलग है। इसके बाद मतगणना शुरू होगी। डाक से आए मतपत्रों की गिनती और कुछ राज्यों में लागू अलग चुनावी प्रक्रियाओं के कारण सभी सीटों के नतीजे एक ही दिन स्पष्ट होना जरूरी नहीं है।
इसलिए शुरुआती रुझानों को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। प्रतिनिधि सभा और सीनेट में किस दल को बहुमत मिलता है, इसकी तस्वीर मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही साफ होगी।
written by Siddhi Srivastava



