
Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने बातचीत को लेकर अपनी शर्तें सामने रखी हैं। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई के मुताबिक, यदि अमेरिका उसकी सात शर्तें स्वीकार कर लेता है तो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उस पर दोबारा हमला हुआ तो वह कड़ा जवाब देगा।
रेजाई ने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनेई के निर्देशों का हवाला देते हुए दावा किया कि जरूरत पड़ने पर ईरान नए हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है।
कतर की मध्यस्थता में हुई 12 घंटे से ज्यादा बातचीत
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को कतर के मध्यस्थों ने ईरान की राजधानी तेहरान में 12 घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। इस बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा करना बताया गया है।
ईरान की ओर से रखी गई शर्तों के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि क्या अमेरिका तेहरान की मांगों पर विचार करेगा। फिलहाल दोनों देशों के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है। ईरान पहले प्रतिबंधों और आर्थिक मुद्दों पर राहत चाहता है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतों की मांग कर रहा है।
ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं?
ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखने की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में सभी सात शर्तों का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। इसमें जिन प्रमुख मांगों का उल्लेख है, वे इस प्रकार हैं:
- तेल निर्यात पर राहत: ईरान अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील चाहता है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेच सके।
- विदेशों में जमा रकम की वापसी: तेहरान विदेशों में जमा अपनी रकम वापस दिलाने की मांग कर रहा है। रिपोर्ट में कतर में जमा करीब 6 अरब डॉलर का भी उल्लेख है।
- आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करे।
ईरान का दावा है कि जून 2026 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका ने तेल निर्यात में छूट देने और नई पाबंदियां नहीं लगाने का भरोसा दिया था। तेहरान अब इसी कथित आश्वासन के आधार पर राहत की मांग कर रहा है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका चाहता है रियायत
दूसरी ओर, अमेरिका बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायत चाहता है। वॉशिंगटन की प्राथमिकता परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण और उनसे जुड़े मुद्दों पर समझौता करना बताई जा रही है।
इस तरह दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर है। ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अपनी विदेशों में जमा संपत्ति की वापसी को अहम मान रहा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर ठोस आश्वासन चाहता है।
हमले की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी
ईरान ने बातचीत की संभावना जताने के साथ सैन्य कार्रवाई को लेकर भी चेतावनी दी है। मोहसेन रेजाई के मुताबिक, यदि अमेरिका ईरान पर फिर से हमला करता है तो तेहरान उसका सख्ती से जवाब देगा।
उन्होंने नए हथियारों के इस्तेमाल की संभावना का भी जिक्र किया। हालांकि, किस तरह के हथियार इस्तेमाल किए जा सकते हैं और इसके लिए क्या रणनीति होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्या फिर शुरू होगी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत?
ईरान की सात शर्तों और अमेरिका की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी मांगों के बीच कूटनीतिक समाधान की राह आसान नहीं दिखती। दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के लिए मांगों पर सहमति और भरोसे का माहौल बनना जरूरी होगा।
फिलहाल तेहरान ने बातचीत का विकल्प खुला रखने की बात कही है, लेकिन साथ ही सैन्य जवाब की चेतावनी भी दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और कतर जैसे मध्यस्थ देश आगे बातचीत कराने में कितनी भूमिका निभाते हैं।
written by Siddhi Srivastava



