
INDIA Alliance Rally: दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली विपक्षी INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली को लेकर अब सियासी हलचल के साथ-साथ व्यापारिक संगठनों की चिंता भी बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारियों ने इस रैली को टालने की मांग करते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चिट्ठी लिखी है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण राजधानी के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार और परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि दिल्ली में रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है और इस दौरान व्यापार ठप होने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, दिल्ली के व्यापारियों को आशंका है कि इतनी बड़ी भीड़ के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के आसपास यातायात व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर बाजारों में आने-जाने वाले ग्राहकों, माल की सप्लाई और व्यापार पर पड़ेगा।
सोनिया गांधी से लगाई आखिरी उम्मीद, राहुल गांधी को भी लिखा था पत्र
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने पहले राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की थी। अब संगठन ने सोनिया गांधी से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। पत्र में व्यापारियों ने लिखा है कि सोनिया गांधी ने हमेशा छोटे व्यापारियों की आवाज सुनी है और उन्हें उम्मीद है कि वह उनकी परेशानी को समझेंगी।
CTI ने रैली को लेकर दो प्रमुख सुझाव दिए हैं। पहला, रैली को दिवाली के बाद 10-11 नवंबर या उसके बाद आयोजित किया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली के दौरान व्यापार प्रभावित न हो। दूसरा, यदि रैली की तारीख बदलना संभव नहीं है तो इसे रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी मैदान में आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि बुराड़ी मैदान में करीब 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है, जिससे मध्य दिल्ली में जाम की समस्या कम होगी।
व्यापारियों ने अखिलेश यादव और ममता बनर्जी को भी पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि त्योहारों का सीजन कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में बड़ी रैली के कारण बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हुआ तो इसका नुकसान छोटे और बड़े सभी व्यापारियों को उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों ने गिनाए चार बड़े संकट
CTI ने अपने पत्र में रैली के कारण पैदा होने वाली संभावित परेशानियों को चार प्रमुख बिंदुओं में रखा है। संगठन का कहना है कि इन समस्याओं का असर केवल रैली वाले दिन ही नहीं, बल्कि उससे एक दिन पहले यानी 31 अक्टूबर से ही दिखाई देना शुरू हो सकता है।
1. पार्किंग की भारी समस्या
CTI के मुताबिक, रामलीला मैदान में 200 बड़ी बसों की पार्किंग की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर रैली में लाखों लोग पहुंचते हैं तो उनके वाहनों को कहां खड़ा किया जाएगा? संगठन का अनुमान है कि भीड़ को लाने के लिए 15 से 20 हजार तक बसों, कारों और अन्य वाहनों की जरूरत पड़ सकती है।
इन वाहनों के कारण जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड सहित कई प्रमुख रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है। व्यापारियों को डर है कि इससे मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली में लंबे समय तक जाम लग सकता है।
2. पांच किलोमीटर के दायरे में 20 बड़े बाजार प्रभावित होने की आशंका
CTI ने बताया कि रामलीला मैदान के करीब पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के लगभग 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार आते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, करोल बाग, जामा मस्जिद और पहाड़गंज जैसे बाजार शामिल हैं।
संगठन का दावा है कि इन बाजारों में रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना करीब 5 हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। वहीं, लगभग 3 हजार ट्रक रोजाना दिल्ली से माल लेकर एनसीआर के शहरों और देश के अलग-अलग राज्यों में जाते हैं। ऐसे में रास्तों पर जाम लगने से माल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
3. 31 अक्टूबर से ही शुरू हो सकती है परेशानी
व्यापारियों का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर को ही नहीं पड़ेगा। 31 अक्टूबर की दोपहर से ही दिल्ली के सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर बसों और दूसरे वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है।
इसके अलावा शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग की आशंका भी जताई गई है। CTI के मुताबिक, कई ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही दिल्ली में गाड़ियां भेजने को लेकर हिचकिचा रहे हैं। इससे बाजारों में माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
4. 10 अक्टूबर के जाम का दिया उदाहरण
CTI ने अपने पत्र में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया है। संगठन का दावा है कि उस दिन करीब 5 से 7 हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद सेंट्रल दिल्ली में लगभग 8 घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में व्यापारियों का सवाल है कि जब कुछ हजार लोगों की भीड़ से इतनी परेशानी हुई तो लाखों लोगों के पहुंचने पर हालात कैसे होंगे?
धनतेरस और दिवाली की खरीदारी पर पड़ सकता है असर
व्यापारियों की चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों बढ़ जाती हैं। 6 नवंबर को धनतेरस होने के चलते व्यापारी पहले से ही बड़े कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में अगर रैली के कारण रास्ते बंद होते हैं या जाम लगता है तो ग्राहकों का बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
CTI का कहना है कि दिल्ली और आसपास के शहरों से रोजाना करीब 3 से 4 लाख लोग खरीदारी के लिए राजधानी के अलग-अलग बाजारों में आते हैं। यातायात प्रभावित होने की आशंका से ये ग्राहक दिल्ली आने से बच सकते हैं।
फिलहाल व्यापारिक संगठनों ने राजनीतिक नेताओं से रैली की तारीख बदलने या आयोजन स्थल में बदलाव करने की अपील की है। अब देखना होगा कि INDIA गठबंधन के नेता व्यापारियों की इन चिंताओं को कितना महत्व देते हैं और क्या रैली के आयोजन को लेकर कोई बदलाव किया जाता है।



