
Saurabh Das-Ashutosh Ranka: दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को रिहा करने का आदेश दिया। रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने अदालत के सामने लिखित आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाइड रहेगा, तब तक वे वहां किसी भी तरह के प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी दिया।
दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका और उसकी सभी संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। उनके लिखित आश्वासन और जमानत स्वीकार किए जाने के बाद SEM कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश जारी किया।
कोर्ट में सौरभ दास और आशुतोष रांका ने क्या-क्या वादे किए?
सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं ने अदालत के सामने कुछ प्रमुख शर्तों का पालन करने का लिखित वचन दिया। इनमें शामिल हैं:
जब तक जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल डी-नोटिफाइड रहता है, वहां किसी भी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था भंग नहीं करेंगे।
न्यायपालिका और SEM कोर्ट सहित उसकी सभी संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखेंगे।
इन आश्वासनों के बाद असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) ऋतु राज, जो स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत हैं, ने दोनों नेताओं की जमानत स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया।
23 अक्टूबर को फिर अदालत में होना होगा पेश
इस मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस दिन सौरभ दास और आशुतोष रांका को अपनी जमानत के साथ दोबारा SEM कोर्ट में पेश होना होगा।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को भी मामले में सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में इस रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
SIR के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर में अवैध रूप से प्रवेश किया।
इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत अवधि दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई थी।
दिल्ली पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि दोनों नेताओं की रिहाई से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पुलिस की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए SEM कोर्ट ने उस समय उनकी हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया था।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की जताई थी आशंका
19 अक्टूबर को दिए गए आदेश में SEM कोर्ट ने दोनों नेताओं के आचरण पर चिंता जताई थी। अदालत के अनुसार, उनके व्यवहार से कानून के प्रति सम्मान की कमी और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा होती है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि दोनों नेता डी-नोटिफाइड क्षेत्रों में प्रदर्शन का आह्वान करने के आदी हो चुके हैं। हालांकि, बुधवार को दोनों की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने और जमानत स्वीकार होने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।
अब इस मामले में 23 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जिसमें दोनों नेताओं को फिर अदालत में पेश होना है और पुलिस को अपनी सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करनी है।



