UP Politics: यूपी में कुर्मी वोटों पर BJP-सपा की नजर, 50-60 सीटों पर असर; रोहनिया से अखिलेश का दांव!

UP Politics: पटेल जयंती पर बीजेपी 98 संगठनात्मक जिलों में करेगी कार्यक्रम, वाराणसी की रोहनिया सीट पर अखिलेश यादव की संभावित रैली को लेकर चर्चा तेज।

UP Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) ने जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी है। इस बीच कुर्मी समाज के वोटों पर दोनों दलों की नजर है। राजनीतिक आकलनों के मुताबिक, प्रदेश की करीब 50 से 60 विधानसभा सीटों पर कुर्मी मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को इस राजनीतिक कवायद के लिहाज से अहम मानी जा रही है। बीजेपी ने प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में पटेल जयंती मनाने की तैयारी की है। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से चुनावी अभियान शुरू करने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सपा की ओर से रैली की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बीजेपी ने कुर्मी समाज तक पहुंच बढ़ाने की बनाई रणनीति

बीजेपी के पिछड़ा मोर्चा की ओर से 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में मनाई जाएगी। पार्टी के इस कार्यक्रम को कुर्मी समाज समेत अन्य पिछड़े वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी संगठन की जिम्मेदारियों में कुर्मी समाज से जुड़े नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े और सह-प्रभारी जगदीश पटेल का संबंध कुर्मी समुदाय से है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री और महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान सौंपी गई थी। पंकज चौधरी भी कुर्मी समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

बीजेपी ने पूर्व सांसद रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बनाए रखा है। इसके अलावा अपना दल (एस) के साथ गठबंधन भी पार्टी की पिछड़ा वर्ग रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं और कुर्मी समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं।

सपा की नजर वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर

कुर्मी मतदाताओं को लेकर समाजवादी पार्टी भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी है। चर्चा है कि अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर वाराणसी से चुनावी अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। इसके लिए रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में रैली आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कुछ दिन पहले वाराणसी पहुंचकर स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद संभावित रैली की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। रोहनिया क्षेत्र में कुर्मी समाज की उल्लेखनीय आबादी होने के कारण इसे संभावित कार्यक्रम स्थल के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से कार्यक्रम की तारीख, स्थान और अखिलेश यादव की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

यूपी की कितनी सीटों पर असर डाल सकता है कुर्मी वोट बैंक?

उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माना जाता है। उपलब्ध राजनीतिक आकलनों के मुताबिक, राज्य की आबादी में इस समुदाय की हिस्सेदारी करीब 4 से 5 प्रतिशत बताई जाती है। इसकी मौजूदगी पूर्वांचल, अवध, रुहेलखंड और बुंदेलखंड के विभिन्न इलाकों में है।

कुर्मी मतदाताओं का प्रभाव महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, बाराबंकी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र और बरेली समेत कई जिलों में माना जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश की करीब 50 से 60 विधानसभा सीटों पर यह समुदाय चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है, जबकि लगभग 130 सीटों पर इसकी उपस्थिति बताई जाती है।

हालांकि, किसी सीट पर चुनावी प्रभाव केवल आबादी के अनुपात से तय नहीं होता। उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन, क्षेत्रीय समीकरण और मतदान का रुझान भी नतीजों को प्रभावित करते हैं।

2022 के चुनाव में कुर्मी मतदाताओं का रुझान कैसा रहा?

लेख में CSDS-Lokniti के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुर्मी मतदाताओं के करीब 66 प्रतिशत वोट NDA के पक्ष में जाने का दावा किया गया है। इसी आंकड़े में समाजवादी पार्टी को 25 प्रतिशत, बहुजन समाज पार्टी को 3 प्रतिशत, कांग्रेस को 4 प्रतिशत और अन्य दलों को 2 प्रतिशत वोट मिलने की बात कही गई है।

ये आंकड़े कुर्मी मतदाताओं के बीच उस चुनाव में NDA की बढ़त की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, इन्हें पूरे समुदाय की स्थायी राजनीतिक पसंद नहीं माना जा सकता। अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाताओं का रुझान उम्मीदवारों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।

संपादकीय सावधानी: प्रकाशन से पहले CSDS-Lokniti के मूल आंकड़ों और सर्वेक्षण के नमूने की पुष्टि कर लें। मतदान संबंधी आंकड़ों को सर्वेक्षण या अनुमान के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उपयुक्त होगा।

विधानसभा और लोकसभा में कुर्मी समाज के प्रतिनिधि

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में कुर्मी समाज से जुड़े 40 विधायक हैं। इनमें बीजेपी के 27, समाजवादी पार्टी के 12 और कांग्रेस का एक विधायक शामिल बताया गया है।

लोकसभा में भी कुर्मी समाज से जुड़े कई प्रतिनिधि सक्रिय हैं। रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा, नरेश उत्तम पटेल, राम प्रसाद चौधरी, उत्कर्ष वर्मा, शिवपाल सिंह पटेल, कृष्णा देवी, शिवशंकर पटेल और राम शिरोमणि वर्मा के नाम दिए गए हैं। बीजेपी की ओर से पंकज चौधरी, छत्रपाल सिंह गंगवार और प्रवीण पटेल तथा अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल का उल्लेख किया गया है।

इन नामों और समुदाय संबंधी वर्गीकरण की प्रकाशन से पहले आधिकारिक संसदीय एवं विधानसभा रिकॉर्ड से पुष्टि आवश्यक है। खास तौर पर प्रतिनिधियों की वर्तमान सदस्यता और सामाजिक पहचान से जुड़े दावों को अलग-अलग सत्यापित किया जाना चाहिए।

31 अक्टूबर के कार्यक्रमों पर रहेंगी राजनीतिक निगाहें

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर बीजेपी के प्रदेशव्यापी कार्यक्रम और वाराणसी में सपा की संभावित रैली को आगामी चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दल कुर्मी समाज सहित पिछड़े वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

फिलहाल बीजेपी के कार्यक्रम की घोषणा और सपा की संभावित रैली को लेकर उपलब्ध जानकारी में अंतर है। आगे की तस्वीर आधिकारिक घोषणाओं और कार्यक्रमों के आयोजन के बाद अधिक स्पष्ट होगी।

written by Siddhi Srivastava

Show More

Related Articles

Back to top button