सौरभ दास और आशुतोष रांका जेल से रिहा, कोर्ट को दिया शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन; अभिजीत दीपके बोले- जान हाजिर है!

दिल्ली की अदालत ने CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की पुलिस की मांग खारिज की। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।

दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को अदालत से राहत मिल गई है। बुधवार को दिल्ली की अदालत ने दोनों नेताओं को जमानत दे दी, जिसके बाद देर रात उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। दोनों नेताओं ने अदालत को लिखित आश्वासन दिया है कि वे भविष्य में शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और अपने विरोध-प्रदर्शन संविधान तथा कानून के दायरे में रहकर करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अपने दोनों साथियों की तारीफ करते हुए कहा कि वे उनके हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार हैं।

अदालत ने क्यों दी सौरभ दास और आशुतोष रांका को राहत?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरभ दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी।

हालांकि, अदालत ने पुलिस की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत का मानना था कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों नेताओं से पर्सनल बॉन्ड और लिखित आश्वासन लेना पर्याप्त है। फिलहाल उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अदालत ने जमानत बॉन्ड स्वीकार करते हुए दोनों को रिहा करने का आदेश दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके के साथ जमानतदार पेश किए। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

CJP नेताओं ने अदालत को क्या लिखकर दिया आश्वासन?

रिहाई के दौरान दोनों नेताओं ने अदालत को लिखित गारंटी दी कि वे शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि भविष्य में उनके विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक मर्यादाओं और कानून के दायरे में रहकर किए जाएंगे।

इस आश्वासन को अदालत की ओर से राहत दिए जाने के दौरान महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस जहां दोनों की हिरासत बढ़ाने की मांग कर रही थी, वहीं अदालत ने लिखित आश्वासन और निजी मुचलके को पर्याप्त मानते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया।

हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों नेताओं को मामले में बरी कर दिया गया है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। दोनों को अगली सुनवाई के दौरान अदालत में पेश होना होगा।

अभिजीत दीपके ने सौरभ और आशुतोष के लिए क्या कहा?

सौरभ दास और आशुतोष रांका के जेल से बाहर आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दोनों नेताओं की तारीफ करते हुए उन्हें खुद से भी बड़ा नेता बताया।

अभिजीत दीपके ने लिखा, “सौरभ और आशु न सिर्फ मुझसे बेहतर, बल्कि मुझसे बहुत-बहुत बड़े नेता हैं। अपने नेताओं के हर हुक्म का पालन करने के लिए तैयार हूं। जान हाजिर है!”

उनकी इस पोस्ट को पार्टी के दोनों नेताओं के प्रति समर्थन और एकजुटता के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। रिहाई के बाद दीपके की प्रतिक्रिया ने इस मामले को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चाओं को भी नया विषय दिया है।

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23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सौरभ दास और आशुतोष रांका को फिलहाल रिहाई मिल गई है, लेकिन उनके मामले में कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित है। इस दौरान दोनों नेताओं को अदालत में पेश होना होगा।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और सुनवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल अदालत ने पुलिस की ओर से हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए दोनों नेताओं को निजी मुचलके और लिखित आश्वासन के आधार पर राहत दी है।

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