Dhirendra Shastri :धीरेंद्र शास्त्री की रथ यात्रा दमोह पहुंची, धर्मसभा में जातिगत भेदभाव मिटाकर एकजुट होने का संदेश

Dhirendra Shastri: Dhirendra Shastri's *Rath Yatra* reached Damoh; the religious gathering conveyed a message of unity by eradicating caste-based discrimination.

Dhirendra Shastri :बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा मंगलवार को मध्य प्रदेश के दमोह पहुंची। यात्रा के स्वागत के लिए रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालु जुटे। पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यहां शास्त्री ने सप्त संकल्पों के माध्यम से सनातन समाज को एकजुट करने, जातिगत भेदभाव समाप्त करने और सामाजिक समरसता बढ़ाने का आह्वान किया। हालांकि, आयोजन के दौरान भारी भीड़ के कारण कई बार अव्यवस्था की स्थिति बनी। श्रद्धालुओं ने चेन, मंगलसूत्र और पर्स चोरी होने की शिकायतें भी कीं।

जानकारी के लिए बता दें कि रथ यात्रा ने 12 अक्टूबर को दमोह जिले में प्रवेश किया था। हटा में रात्रि विश्राम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और दिव्य दरबार लगाया। मंगलवार सुबह यात्रा हटा से रवाना हुई। पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दमोह पहुंचने तक कई जगह लोगों ने उसका स्वागत किया।

सात संकल्पों से एकजुटता का संदेश

पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित शास्त्री ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सप्त संकल्पों के जरिए समाज में जागरूकता और एकता की भावना मजबूत करना है। उन्होंने जातिगत भेदभाव और आपसी दूरियां खत्म कर समाज को संगठित होने की जरूरत बताई।

अपने संबोधन में उन्होंने भगवान रामानंदाचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 1400 वर्ष पहले समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठने का संदेश दिया गया था। उन्होंने कहा, “जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।” शास्त्री ने सामाजिक समरसता को सनातन समाज की एकता के लिए जरूरी बताया।

धर्मसभा में युवतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “दुर्गा बनना, काली बनना, पर कभी ना बुर्के वाली बनना।” महिलाओं की वेशभूषा और धार्मिक पहचान से जुड़ा उनका यह बयान भी चर्चा का विषय रहा।

भीड़ के बीच व्यवस्था संभालने में जुटे रहे सुरक्षाकर्मी

कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के चलते कई बार व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। मंच तक पहुंचने और पंडित शास्त्री के नजदीक जाने की कोशिश में भीड़ बढ़ती रही। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने में आई कठिनाइयों के बीच आयोजन स्थल की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठे।

चेन, मंगलसूत्र और पर्स चोरी की शिकायतें

धर्मसभा के दौरान कई श्रद्धालुओं ने चेन, मंगलसूत्र और पर्स गायब होने की शिकायत की। इस बीच दो लोगों को पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने आशंका जताई कि दोनों चोरी की घटनाओं में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने उनकी संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

दमोह पहुंची रथ यात्रा में एक ओर श्रद्धालुओं का उत्साह और सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर भारी भीड़, अव्यवस्था और चोरी की शिकायतों ने सुरक्षा प्रबंधन की चुनौतियों को सामने रखा।

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