
Akhilesh Yadav: लखनऊ में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और कई विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी वोट दर्ज होने के मामले सामने आए हैं। अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा की कथित योजना को सफल नहीं होने देगी और 403 विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाएगी।
SIR प्रक्रिया पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की शुचिता से खिलवाड़ किया गया है। उनके मुताबिक, कई जगह एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोट दर्ज होने जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं। सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मामलों की पहचान की है और जल्द ही इससे जुड़ी सूची सार्वजनिक की जाएगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि SIR प्रक्रिया में करोड़ों रुपये खर्च किए गए और काफी समय भी लगा, लेकिन इसके बावजूद मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित धांधली को सफल नहीं होने देगी।
हालांकि, मतदाता सूची में फर्जी नामों और एक व्यक्ति के नाम पर कई वोट दर्ज होने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है। अखिलेश यादव ने इन आरोपों के समर्थन में सूची जारी करने की बात कही है।
403 विधानसभा सीटों को लेकर क्या बोले सपा प्रमुख?
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी इन मामलों को सामने लाकर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करेगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो रही हैं। मतदाता सूची का पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता राजनीतिक दलों के बीच बहस का अहम मुद्दा बन चुके हैं।
SIR को लेकर विपक्षी दल पहले भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते रहे हैं। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों पर अंतिम स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी से ही स्पष्ट होगी।
लोहिया की पुण्यतिथि पर समाजवाद का संदेश
राजनीतिक आरोपों के बीच अखिलेश यादव लखनऊ स्थित लोहिया पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने समाजवादी विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उन्होंने लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
अखिलेश यादव ने कहा कि डॉ. लोहिया का समाजवाद ऐसा रास्ता दिखाता है, जहां समृद्धि और समानता साथ-साथ आगे बढ़ती हैं। उन्होंने लोहिया की सप्त क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए प्रासंगिक हैं। अखिलेश ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए कहा कि नेताजी कार्यकर्ताओं के बीच लोहिया के विचारों और संघर्ष की चर्चा करते थे।
सपा अध्यक्ष ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान, डॉ. लोहिया के समाजवाद और मुलायम सिंह यादव के संघर्ष को पार्टी की वैचारिक नींव बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी भेदभाव और जातिवाद को समाप्त कर धर्मनिरपेक्ष तथा समानता पर आधारित समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा विवाद
अखिलेश यादव का बयान ऐसे दौर में आया है, जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद जारी है। विपक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर विपक्ष के कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी उठाई है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। दूसरी ओर, ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची, दावों-आपत्तियों के रिकॉर्ड और चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी का परीक्षण जरूरी है।
फिलहाल, अखिलेश यादव ने कथित फर्जी वोटों की सूची जारी करने की बात कहकर इस मुद्दे पर सियासी बहस को और तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि समाजवादी पार्टी अपने आरोपों के समर्थन में कौन-से दस्तावेज सामने रखती है और चुनाव आयोग इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।



