
International News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा में हैं। 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार विशेषज्ञ नवी पिल्लई के चयन के बाद ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पुरस्कार देने वाली समिति के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे शर्मनाक बताया और दावा किया कि दुनिया के कई संघर्षों को खत्म कराने में उनकी भूमिका रही है। ट्रंप के मुताबिक, उनके काम को देखते हुए उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।
नोबेल कमेटी के फैसले पर ट्रंप ने उठाए सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट लिखकर नोबेल शांति पुरस्कार के चयन पर नाराजगी जताई। उन्होंने पुरस्कार के फैसले को लेकर नॉर्वे और संबंधित लोगों की आलोचना की। ट्रंप ने दावा किया कि इस निर्णय से पुरस्कार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने नवी पिल्लई की उपलब्धियों पर भी सवाल उठाए और उन पर इजरायल-विरोधी रुख रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार ऐसे व्यक्ति को दिया गया, जिनके बारे में उनके अनुसार बहुत कम लोग जानते हैं। हालांकि, ये ट्रंप के व्यक्तिगत और राजनीतिक विचार हैं। उनकी टिप्पणी से नवी पिल्लई के मानवाधिकार संबंधी काम या पुरस्कार के लिए उनके चयन के आधार अपने आप खारिज नहीं होते।
ट्रंप का दावा- मैंने आठ युद्धों को शांत कराया
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में उन संघर्षों का जिक्र किया, जिन्हें सुलझाने में उन्होंने भूमिका निभाने का दावा किया। ट्रंप के अनुसार, उनके प्रयासों से दुनिया के आठ बड़े युद्धों को समाप्त कराने या शांत कराने में मदद मिली। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मामलों में समाधान की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए प्रयासों को अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि उनके काम का मूल्यांकन नोबेल शांति पुरस्कार के संदर्भ में किया जाना चाहिए था। उन्होंने यह दावा भी किया कि उन्होंने इतिहास में किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में अधिक लोगों की जान बचाई है।
हालांकि, संघर्षों को समाप्त कराने में किसी नेता की भूमिका और उसके परिणामों का आकलन संबंधित घटनाओं, समझौतों और स्वतंत्र प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। ट्रंप के दावों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी किया जिक्र
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने में भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, इससे पश्चिम एशिया और दूसरे क्षेत्रों में बड़े विनाश का खतरा टालने में मदद मिली।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अहम विषय बने हुए हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान उनकी विदेश नीति और शांति स्थापित करने के दावों को फिर से चर्चा में ले आया है। हालांकि, इन संघर्षों के समाधान में विभिन्न देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और दूसरे पक्षों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।
ओबामा को नोबेल मिलने पर भी जता चुके हैं नाराजगी
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी असंतुष्टि जाहिर करते रहे हैं। खास तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में यह सम्मान दिए जाने पर ट्रंप ने कई बार सवाल उठाए हैं। उनका कहना रहा है कि ओबामा को राष्ट्रपति पद के शुरुआती दौर में ही यह पुरस्कार मिल गया था।
अब 2026 के पुरस्कार को लेकर ट्रंप की ताजा प्रतिक्रिया ने एक बार फिर इस बहस को हवा दी है कि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए किए गए प्रयासों का आकलन किस आधार पर होना चाहिए और पुरस्कार के चयन में किन मानकों को महत्व दिया जाता है।
कौन हैं नवी पिल्लई?
नवी पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायविद और मानवाधिकार विशेषज्ञ हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम कर चुकी हैं और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। उनका नाम न्याय, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े कार्यों के कारण पहचाना जाता है।
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की नाराजगी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पुरस्कारों की भूमिका और उनके चयन पर बहस शुरू कर दी है। एक तरफ ट्रंप अपने कार्यकाल में शांति प्रयासों को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरस्कार के चयन को लेकर उनकी तीखी प्रतिक्रिया सुर्खियों में है।



