
SIR Controversy: राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार जारी है। चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और राजघाट पर धरने के बाद अब इंडिया गठबंधन के सांसद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ने शुक्रवार रात 8 बजे विपक्षी सांसदों को मिलने का समय दिया है। इस दौरान विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख सकता है।
हालांकि, राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कितने सांसद शामिल होंगे और बैठक में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। विपक्ष इस मुलाकात को SIR के मुद्दे पर अपनी बात राष्ट्रपति तक पहुंचाने के अहम अवसर के रूप में देख रहा है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव की मुख्य वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में होने वाले बदलावों से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के दौरान विपक्षी सांसद इन मुद्दों को उठाकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से सवाल औपचारिक रूप से रखे जाएंगे, यह मुलाकात के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनाव आयोग तक मार्च से राजघाट तक प्रदर्शन
इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हो गया, जब विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया।
इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन जारी रखा। सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद 8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर धरना दिया और SIR के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
लगातार तीन दिनों से जारी इन गतिविधियों के बीच अब राष्ट्रपति से मुलाकात को विपक्ष की रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है। विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक उसकी बात पहुंचे।
2 अक्टूबर को मांगा गया था मुलाकात का समय
राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश विपक्ष की ओर से पहले ही शुरू कर दी गई थी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, इंडिया गठबंधन की ओर से 2 अक्टूबर को राष्ट्रपति से मिलने का अनुरोध भेजा गया था। विपक्ष ने 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा था।
इसके बाद मीडिया रिपोर्टों में 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय दिए जाने की चर्चा सामने आई। अब सूत्रों के हवाले से शुक्रवार रात 8 बजे का समय मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल में शामिल सांसदों की अंतिम संख्या और नामों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति के सामने अपनी बात रखने से विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक विरोध से आगे संवैधानिक विमर्श के स्तर पर ले जाने की कोशिश कर सकता है।
खरगे के लंच में बनी प्रदर्शन की रणनीति
विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों के साथ लगातार दो दिन बैठकें भी कीं। इन बैठकों का आयोजन दिल्ली के अलग-अलग रेस्टोरेंट में लंच के दौरान हुआ। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में लंच बैठक आयोजित की गई।
इन बैठकों में विपक्षी दलों के नेताओं ने आगे की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद सांसद विरोध प्रदर्शन के लिए निकले। माना जा रहा है कि SIR के मुद्दे पर आगे की कार्रवाई और विपक्षी दलों के बीच समन्वय इन चर्चाओं का अहम हिस्सा रहा।
सपा की गैरमौजूदगी से उठा था सवाल
7 अक्टूबर को खरगे की लंच बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसदों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने स्पष्ट किया था कि विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके।
हालांकि, 8 अक्टूबर को सपा सांसद भी लंच बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे विपक्षी एकजुटता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच साझा विरोध जारी रखने का संकेत मिला।
पुलिस कार्रवाई और एफआईआर से भी बढ़ा तनाव
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच कई बार तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थानों की ओर जाने से रोका और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। वहीं, 8 अक्टूबर को मोएट्स रेस्टोरेंट के पास हुए घटनाक्रम के संबंध में एफआईआर दर्ज होने की खबर भी सामने आई।
राहुल गांधी समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति से होने वाली मुलाकात पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अब अहम सवाल यह है कि राष्ट्रपति के सामने विपक्ष SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कौन-सी मांगें रखता है और इस मुलाकात के बाद उसके आंदोलन की दिशा क्या होगी। फिलहाल, रात 8 बजे होने वाली बैठक को लेकर विपक्षी खेमे में हलचल तेज है।



