
UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने उन पर निशाना साधा है। राजभर ने सवाल उठाया कि अयोध्या पहुंचने के बावजूद अखिलेश यादव ने रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन क्यों नहीं किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी के डर से मंदिर जाने से बचते हैं। राजभर के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आस्था और वोट बैंक की बहस को फिर हवा दे दी है।
अखिलेश के अयोध्या दौरे पर राजभर का तीखा हमला
ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि अखिलेश अयोध्या तो पहुंचे, लेकिन रामलला के दर्शन करने नहीं गए। राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वह दर्शन करने जाते भी कैसे, क्योंकि ऐसा करने से उनके मुस्लिम समर्थक नाराज हो सकते थे।
राजभर ने अपनी पोस्ट में अयोध्या से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने अखिलेश यादव के पिता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग का मुद्दा उठाया। राजभर ने सवाल किया कि अयोध्या की सड़कों पर पहुंचने के दौरान क्या अखिलेश को कारसेवकों की याद नहीं आई।
हालांकि, ये सवाल और आरोप राजभर की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा हैं। अखिलेश यादव की ओर से इस विशेष बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
‘आस्था है तो राजनीतिक समीकरण का बंधक मत बनिए’
राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव की धार्मिक आस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर सपा प्रमुख की भगवान राम में आस्था है, तो उन्हें राजनीतिक समीकरणों के दबाव में नहीं रहना चाहिए। वहीं, राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उनकी आस्था नहीं है, तो उन्हें खुलकर अपनी बात कहनी चाहिए।
राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अखिलेश यादव को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आस्तिक हैं या नास्तिक। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में सपा प्रमुख दोनों पक्षों को साधना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने से उन्हें राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
राजभर के इस बयान का निशाना सीधे अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति पर है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों और विभिन्न समुदायों के समर्थन को लेकर पहले भी सपा और भाजपा के बीच तीखी बहस देखने को मिलती रही है।
इफ्तार और प्रसाद की तस्वीरों को लेकर भी कसा तंज
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव की इफ्तार और प्रसाद ग्रहण करने से जुड़ी तस्वीरों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इफ्तार के दौरान अखिलेश यादव जिस सहजता से दिखाई देते हैं, वैसी सहजता प्रसाद ग्रहण करते समय नजर नहीं आती।
राजभर ने इस अंतर को राजनीतिक संदेश से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की प्राथमिकता धार्मिक आस्था से ज्यादा वोटों का समीकरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सपा प्रमुख भविष्य में राम मंदिर और हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन करेंगे।
यह पूरा विवाद फिलहाल राजभर के आरोपों और राजनीतिक व्यंग्य के इर्द-गिर्द है। तस्वीरों के आधार पर किसी नेता की धार्मिक आस्था या उसके इरादों के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
ANI से बातचीत में भी अखिलेश पर साधा निशाना
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान भी ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव अयोध्या गए थे, तो उन्हें हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन भी करने चाहिए थे।
राजभर ने साधु-संतों को दक्षिणा देने के तरीके पर भी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए समाज को बांटने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह दावा भी किया कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में भेदभाव नहीं होता और मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसे स्वीकार करते हैं।
राजभर के इन बयानों में अखिलेश यादव की धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सपा की सामाजिक और चुनावी रणनीति पर भी निशाना साधा गया है।
भागवत कथा में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे अखिलेश
दरअसल, अखिलेश यादव अयोध्या धाम के पास स्थित कृष्णापुर खानपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में शामिल होने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम पूर्व मंत्री और अयोध्या से सपा विधायक तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित किया गया था।
इसी दौरे के बाद रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन नहीं करने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हुई। राजभर ने इस मुद्दे को उठाते हुए अखिलेश यादव पर धार्मिक आस्था के बजाय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दल लगातार सपा की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सपा अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटी है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव राजभर के इस हमले का जवाब किस तरह देते हैं और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बनता है।



