
Fuel Consumption: सितंबर 2026 में देश के ईंधन बाजार से जुड़ा एक अलग ट्रेंड सामने आया है। एक ओर सड़क परिवहन में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल की बिक्री में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं घरेलू और अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली LPG की खपत में तेज गिरावट आई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में पेट्रोल की बिक्री 7.21 प्रतिशत और डीजल की बिक्री 4.86 प्रतिशत बढ़ी। इसके उलट LPG की खपत 9.15 प्रतिशत कम हुई।
सितंबर में पेट्रोल-डीजल की तस्वीर कैसी रही?
सितंबर में पेट्रोल की बिक्री बढ़कर 3.64 मिलियन टन पहुंच गई। पिछले साल सितंबर के मुकाबले इसमें 7.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
डीजल की मांग में भी तेजी देखने को मिली। देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम उत्पाद डीजल की बिक्री 4.86 प्रतिशत बढ़कर 7.12 मिलियन टन हो गई।
इस तरह परिवहन से जुड़े दोनों प्रमुख ईंधनों की खपत में सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
LPG की खपत में कितनी गिरावट आई?
पेट्रोल और डीजल के उलट LPG की तस्वीर अलग रही। सितंबर में LPG की खपत 9.15 प्रतिशत घटकर 2.64 मिलियन टन रह गई।
छह महीने यानी अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि को देखें तो LPG की खपत में गिरावट और ज्यादा रही। इस दौरान LPG की खपत सालाना आधार पर 14.93 प्रतिशत घटकर 13.79 मिलियन टन रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 16.28 मिलियन टन थी।
LPG की मांग घटने की वजह क्या है?
LPG की खपत में आई गिरावट के पीछे सबसे महत्वपूर्ण वजहों में पश्चिम एशिया में जारी संकट और उससे जुड़ी आपूर्ति संबंधी परेशानियां बताई जा रही हैं।
भारत अपनी LPG जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली आपूर्ति में व्यवधान का असर LPG की उपलब्धता पर पड़ा। इससे कुछ समय के दौरान सप्लाई पर दबाव और उपलब्धता की चुनौतियां बढ़ीं।
क्या इसका मतलब घरों में LPG का इस्तेमाल बंद हो रहा है?
LPG की कुल खपत में कमी को सीधे तौर पर यह नहीं माना जा सकता कि घरों में खाना पकाने के लिए LPG का इस्तेमाल खत्म या बहुत कम हो गया है।
देश में अभी भी करोड़ों घरेलू LPG कनेक्शन सक्रिय हैं। PPAC के अनुसार, 1 सितंबर 2026 तक करीब 3,277.50 लाख एक्टिव घरेलू LPG कनेक्शन थे। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कनेक्शन भी शामिल हैं।
इसलिए सितंबर के आंकड़ों को समझते समय आपूर्ति, उपलब्धता और उपभोक्ताओं के ईंधन विकल्पों में बदलाव जैसे कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
PNG की ओर बढ़ाने पर भी जोर
LPG पर आयात निर्भरता कम करने के लिए देश में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्धता वाले क्षेत्रों में LPG उपभोक्ताओं को PNG की ओर स्थानांतरित करने और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
PPAC के मुताबिक, जुलाई 2026 के अंत तक देश में 1.75 करोड़ से अधिक घरेलू PNG कनेक्शन मौजूद थे।
छह महीने के आंकड़ों में भी पेट्रोल-डीजल आगे
अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान भी पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- पेट्रोल की खपत 7 प्रतिशत बढ़कर 22.67 मिलियन टन हुई।
- डीजल की मांग 4.85 प्रतिशत बढ़कर 47.89 मिलियन टन पहुंची।
- वहीं LPG की खपत 14.93 प्रतिशत घटकर 13.79 मिलियन टन रह गई।
- इस अवधि में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की खपत करीब 0.39 प्रतिशत बढ़कर 4.43 मिलियन टन रही।
ईंधन बाजार में दिखा अलग-अलग मांग का ट्रेंड
सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों की मांग एक जैसी दिशा में नहीं बढ़ रही है। परिवहन ईंधनों यानी पेट्रोल और डीजल की बिक्री में वृद्धि हुई, जबकि LPG की खपत दबाव में रही।
LPG की मांग में आई कमी को केवल घरेलू इस्तेमाल में कमी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। आयात पर निर्भरता, पश्चिम एशिया की परिस्थितियां, आपूर्ति में व्यवधान और वैकल्पिक गैस कनेक्शनों की ओर बढ़ता रुझान भी इस बदलाव को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हैं।
written by Siddhi Srivastava



