
UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है। इसी बीच प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने PDA की राजनीति, कार्यकर्ताओं की भूमिका और अखिलेश यादव की प्रस्तावित यात्रा को लेकर सवाल खड़े किए।
संजय निषाद ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों ने 27 प्रतिशत आरक्षण के लाभ पर कुछ वर्गों के वर्चस्व का सवाल खड़ा किया है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिस पर सपा की ओर से इस रिपोर्ट में कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी उठाए सवाल
संजय निषाद ने सपा की संगठनात्मक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक अभियान में सबसे ज्यादा मेहनत कार्यकर्ता करते हैं। उनके मुताबिक कार्यकर्ता धूप में खड़े होते हैं, कार्यक्रमों की तैयारियां करते हैं और दरी बिछाने से लेकर भीड़ जुटाने तक की जिम्मेदारी निभाते हैं, जबकि नेता आरामदायक माहौल में लोगों का अभिवादन करते हैं।
उन्होंने इसी संदर्भ में सपा के सामाजिक न्याय और हिस्सेदारी वाले नारे पर भी सवाल उठाया। निषाद ने कहा कि यदि राजनीति में हर बिरादरी की संख्या के आधार पर हिस्सेदारी की बात होती है तो उसका लाभ सभी संबंधित वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
PDA यात्रा को लेकर अखिलेश पर निशाना
संजय निषाद ने अखिलेश यादव की PDA यात्रा को लेकर कहा कि यात्रा निकालना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन अगर किसी यात्रा का उद्देश्य गरीब और पिछड़े वर्गों तक पहुंचना है तो उसका रास्ता भी गांव और गरीब बस्तियों से होकर जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जमीनी राजनीति केवल बड़े रास्तों पर यात्रा निकालने से पूरी नहीं होती। नेता को गांव और गरीबों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव की कथित महंगी गाड़ी को लेकर भी तंज कसा और इसे उनकी PDA राजनीति से जोड़कर सवाल उठाए।
‘मुंह से PDA, दिल में लग्जरी रथ’
अखिलेश यादव की राजनीति में साइकिल और PDA जैसे प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी संजय निषाद ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक तरफ साइकिल और गरीबों की राजनीति की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी और महंगी गाड़ियों में सफर किया जाता है।
निषाद ने इसी अंतर को ‘कथनी और करनी’ से जोड़ते हुए कहा कि जनता राजनीतिक नेताओं के बयानों और उनके व्यवहार के बीच के फर्क को देखती है। उनका यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली पर हमला माना जा रहा है।
27 प्रतिशत आरक्षण पर पुरानी सियासी बहस फिर तेज
27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता इसके लाभ के वर्गवार वितरण तथा उप-वर्गीकरण को लेकर अलग-अलग मांगें उठाते रहे हैं। सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को लागू करने को लेकर भी राजनीतिक बहस होती रही है।
संजय निषाद ने इसी मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि पिछड़ों की राजनीति की बात करने के बावजूद अन्य पिछड़े वर्गों को उनके हिस्से का लाभ कितना मिला। ऐसे में उनका ताजा बयान यूपी की 2027 की राजनीतिक बहस में सामाजिक न्याय और पिछड़ा वर्ग आरक्षण के मुद्दे को फिर सामने लाता है।



