
Global Economy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को और सख्त बनाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून के बाद अमेरिकी प्रशासन को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत या किसी अन्य देश पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। फिलहाल यह एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति परिस्थितियों के अनुसार फैसला ले सकते हैं।
भारत और चीन पर सबसे ज्यादा चर्चा क्यों?
रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े ग्राहकों में शामिल हैं। हाल के महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदा है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है।
यही वजह है कि नए अमेरिकी कानून के बाद सबसे ज्यादा चर्चा भारत और चीन को लेकर हो रही है। हालांकि कानून में किसी देश का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है।
क्या है नए कानून का प्रावधान?
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार रखते हैं। इसके अलावा उन संस्थाओं या पक्षों पर भी कार्रवाई की जा सकती है, जो रूस के ऊर्जा कारोबार को समर्थन देने के आरोप में आते हैं।
हालांकि टैरिफ की अंतिम दर तय करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास ही रहेगा। ऐसे में यह जरूरी नहीं है कि हर मामले में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ ही लगाया जाए।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
यदि भविष्य में अमेरिका इस कानून के तहत कोई सख्त कदम उठाता है, तो भारतीय निर्यातकों और व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को लेकर भी नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
वैश्विक बाजार पर भी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा तेल की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए दुनिया भर के बाजार इस कानून के बाद अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।
राष्ट्रपति के पास छूट देने का भी अधिकार
कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ मामलों में छूट देने की शक्ति भी दी गई है। यदि किसी देश पर कार्रवाई करने से अमेरिका के रणनीतिक या आर्थिक हित प्रभावित होते हैं, तो उसे राहत दी जा सकती है।
यही कारण है कि भारत पर संभावित प्रभाव को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल क्या है स्थिति?
वर्तमान में भारत पर किसी प्रकार का 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। नए कानून ने केवल अमेरिकी प्रशासन को ऐसा कदम उठाने का अधिकार दिया है। इसलिए आने वाले समय में अमेरिका की नीति और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेंगे।
written by Siddhi Srivastava



