
Lord Ganesha: देशभर में गणेशोत्सव की धूम के बीच आज डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन किया जाएगा। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद बप्पा को विदाई देंगे और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करेंगे।

Lord Ganesha: देशभर में गणेशोत्सव की धूम के बीच आज डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन किया जाएगा। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद बप्पा को विदाई देंगे और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई प्रतिमा का डेढ़ दिन बाद विसर्जन करने की परंपरा है। इसी क्रम में 15 सितंबर को भक्त गणपति बप्पा का विसर्जन करेंगे।
पंचांग के अनुसार आज विसर्जन के लिए कई शुभ समय उपलब्ध हैं।
दिन के समय विसर्जन करने वालों के लिए दोपहर का पहला और दूसरा मुहूर्त अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।
विसर्जन से पहले भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर और प्रिय भोग अर्पित करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें और पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।
मान्यता है कि विदाई के समय बप्पा से अगले वर्ष पुनः घर आने का आग्रह किया जाता है। इसी भाव के साथ श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाते हैं।
यदि प्रतिमा प्राकृतिक मिट्टी से बनी है और आकार में छोटी है, तो उसका विसर्जन घर में किसी साफ पात्र या टब में किया जा सकता है। प्रतिमा के पूरी तरह घुलने के बाद उस जल को किसी पौधे या स्वच्छ मिट्टी में प्रवाहित करना बेहतर माना जाता है।
वहीं बड़ी प्रतिमाओं के लिए प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का उपयोग करना अधिक उचित माना जाता है।
गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और पुनर्मिलन की उम्मीद का प्रतीक भी है। भक्त पूरे सम्मान के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष उनके शीघ्र आगमन की प्रार्थना करते हैं।
गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!