Gomti Book Festival 2026: पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साझा की साहित्यिक यात्रा, बोले- लखनऊ पर ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा

Gomti Book Festival 2026: गोमती पुस्तक महोत्सव में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साहित्यिक यात्रा साझा की। उन्होंने लखनऊ की बदलती तस्वीर पर ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा जताई और युवाओं में सकारात्मक सोच के लिए साहित्य की भूमिका बताई।

Gomti Book Festival 2026: गोमती पुस्तक महोत्सव के तीसरे सत्र में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने ‘अनुभव, विचार और संवाद’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में हिस्सा लिया। संवाद के दौरान उन्होंने अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ साहित्य, लेखन और जीवन से जुड़े अनुभवों को साझा किया। सत्र का समन्वय चंद्रशेखर वर्मा ने किया।

लखनऊ पर ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने लखनऊ की बदलती तस्वीर और शहर के सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों पर चर्चा करते हुए कहा कि लखनऊ अपने भीतर कई सदियों का इतिहास, संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन समेटे हुए है।

उन्होंने कहा कि करीब 20 वर्ष पहले का लखनऊ और आज का लखनऊ काफी अलग है। उन्होंने भविष्य में लखनऊ को केंद्र में रखकर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपन्यास की कहानी वर्ष 1916 से 2026 तक की समयावधि को केंद्र में रखकर तैयार करने की योजना है।

‘लव इन लखनऊ’ में युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश

अपनी पुस्तक ‘लव इन लखनऊ’ का जिक्र करते हुए सेन शर्मा ने कहा कि इसे आज के बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर लिखा गया है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रेम संबंधों में असफलता या धोखे के बाद युवा बेहद गंभीर और खतरनाक कदम उठा लेते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में साहित्य युवाओं को भावनात्मक रूप से संभालने, परिस्थितियों को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इन पुस्तकों पर भी हुई चर्चा

संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा की विभिन्न पुस्तकों और उनके लेखन पर चर्चा हुई। इनमें ‘लव इन लखनऊ’, ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’, ‘लव साइड बाय साइड’, ‘द विकसित भारत क्विज’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘मुसाफिर हूँ यारो’, ‘लखनऊ डायरीज’ और ‘एक कदम हजार अफसाने’ शामिल हैं।

उन्होंने अपनी रचनाओं की पृष्ठभूमि, लेखन के अनुभव और साहित्य के प्रति अपने दृष्टिकोण के साथ जीवन से जुड़े कई प्रसंग भी श्रोताओं के साथ साझा किए।

एआई के दौर में भाषा की मौलिकता जरूरी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी सेन शर्मा ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एआई हमेशा हमारी बातों और भावनाओं को उसी तरह प्रस्तुत नहीं करता, जिस तरह हम उन्हें व्यक्त करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अपने साहित्य और समाज को बेहतर ढंग से समझने के लिए भारतीय भाषाओं को स्वयं विकसित और समृद्ध करना होगा। भाषा की मौलिकता, संवेदनशीलता और साहित्यिक अभिव्यक्ति को बनाए रखना आज की महत्वपूर्ण जरूरत है।

‘अंडमान-अंडमानुष’ के अनुभव भी साझा किए

उन्होंने ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’ पर भी विस्तार से चर्चा की और अंडमान-निकोबार से जुड़े अपने अनुभव तथा रोचक प्रसंग श्रोताओं के साथ साझा किए।

कार्यक्रम में समन्वयक चंद्रशेखर वर्मा के सहज और सारगर्भित सवालों ने संवाद को रोचक बनाया। साहित्य, प्रशासन, जीवन-अनुभव और समकालीन विषयों पर केंद्रित इस सत्र के जरिए श्रोताओं को पार्थ सारथी सेन शर्मा के प्रशासनिक व्यक्तित्व के साथ उनके रचनात्मक और साहित्यिक पक्ष को भी जानने का अवसर मिला।

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