BRICS Summit 2026: बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती धाक, विदेशी मीडिया ने की मोदी की कूटनीति की तारीफ

BRICS Summit 2026 पर विदेशी मीडिया ने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और मोदी की रणनीति की सराहना की। नई दिल्ली घोषणापत्र, भारत-चीन रिश्ते और ग्लोबल साउथ चर्चा में रहे।

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर खासा ध्यान खींचा। विदेशी मीडिया ने इसे केवल BRICS सदस्य देशों की बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था, ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव और भारत की मजबूत होती कूटनीतिक भूमिका के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा।

सम्मेलन की कवरेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा, रूस और ईरान की भूमिका के साथ पश्चिम एशिया के बदलते समीकरण प्रमुखता से चर्चा में रहे। विदेशी मीडिया ने खास तौर पर अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों के बीच सहमति बनाने में भारत की भूमिका को रेखांकित किया।

नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति को बड़ी उपलब्धि

रॉयटर्स ने नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति को भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, यूएई, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों को साझा बयान पर सहमत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ऐसी सहमति को आसान नहीं माना गया।

भारत-चीन की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर नजर

न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS को भारत और चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा। रिपोर्ट में यह सवाल प्रमुखता से उठाया गया कि विकासशील देशों की अधिक प्रभावशाली आवाज के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग में से कौन आगे निकलता है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन BRICS को अमेरिकी प्रभाव के विकल्प के तौर पर मजबूत करना चाहता है, जबकि भारत BRICS को किसी एक शक्ति के खेमे में बदलने के बजाय सहयोग और साझा विकास के मंच के रूप में देखता है।

भारत के रुख पर Financial Times की नजर

फाइनेंशियल टाइम्स ने भी भारत और चीन के BRICS को लेकर अलग-अलग नजरिए को प्रमुखता दी। रिपोर्ट के मुताबिक चीन BRICS को वैश्विक शक्ति के तौर पर मजबूत करना चाहता है, जबकि भारत इसे अमेरिका-विरोधी गुट में बदलने के पक्ष में नहीं है।

भारत की कोशिश विकास, व्यापार और सहयोग के साझा मुद्दों पर अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाने की रही है।

शी की भारत यात्रा भी बनी चर्चा का विषय

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने शी चिनफिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम बताया। हालांकि सीमा विवाद, व्यापार घाटा और रणनीतिक मतभेदों को अभी भी बड़ी चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया गया।

वहीं, चीन के चाइना डेली और ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव लाने वाले मंच के तौर पर पेश किया। ग्लोबल टाइम्स ने भारत की डिजिटल और सेवा क्षेत्र की क्षमता तथा चीन की विनिर्माण और सप्लाई चेन की ताकत के बीच सहयोग को ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी बताया।

पाकिस्तान के डॉन ने भी भारत की कूटनीति को रेखांकित किया

पाकिस्तान के अखबार डॉन ने BRICS सम्मेलन को ऐसे समय में भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक परीक्षा बताया, जब दुनिया कई युद्धों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है।

रिपोर्ट में शी चिनफिंग की भारत यात्रा, सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच कम भरोसे के अलावा ईरान-इजराइल तनाव के बीच भारत के ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ संतुलित रिश्तों को भी प्रमुखता दी गई।

भारतीय आतिथ्य की भी विदेशी पत्रकारों ने की तारीफ

BRICS सम्मेलन की कवरेज के लिए भारत पहुंचे विदेशी पत्रकारों ने भारतीय मेहमाननवाजी, संस्कृति, खानपान और तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे की भी सराहना की। कई पत्रकारों ने स्थानीय लोगों के सहयोग और अपनापन को अपने भारत अनुभव का खास हिस्सा बताया।

कुल मिलाकर, विदेशी मीडिया की नजर में BRICS Summit 2026 भारत की कूटनीतिक क्षमता, बदलते वैश्विक समीकरण और ग्लोबल साउथ में उसकी बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करने वाला अहम मंच बनकर उभरा।

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