BRICS Summit 2026 : ‘कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं?’, BRICS में पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तीखा तंज

BRICS Summit 2026: BRICS Summit 2026 में पुतिन ने G7 और पश्चिमी देशों पर तीखा तंज कसा। मोदी ने BRICS की 40% वैश्विक GDP और आधी आबादी की ताकत बताई।

BRICS Summit 2026 : BRICS Summit 2026 के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और यूरोप के नेतृत्व वाले पश्चिमी आर्थिक ढांचे पर तीखा हमला बोला। दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum में पुतिन ने कहा कि दुनिया की आर्थिक ताकत तेजी से बदल रही है और पुराने आर्थिक केंद्रों का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि कमजोर पड़ चुके देश अब भी खुद को G7 क्यों कहते हैं।

पुतिन ने कहा कि क्रय शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर BRICS देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है, जबकि G7 की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी रह गई है। उनके मुताबिक नई अर्थव्यवस्थाएं अब वैश्विक आर्थिक विकास की अगुवाई कर रही हैं।

BRICS में दुनिया की आधी आबादी, GDP में 40 फीसदी हिस्सेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है। समूह की वैश्विक GDP में करीब 40 फीसदी और वैश्विक व्यापार में 25 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है।

मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में दुनिया की GDP करीब ढाई गुना बढ़ी, जबकि BRICS देशों की GDP करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है। इससे BRICS की आर्थिक क्षमता और प्रभाव में तेजी से हुए विस्तार का पता चलता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का समूह नहीं है, बल्कि इनोवेशन, नई तकनीक और वैश्विक व्यापार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

2006 में चार देशों से शुरुआत, अब 21 देशों तक पहुंचा BRICS

मोदी ने BRICS के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2006 में चार देशों के साथ शुरू हुआ यह समूह अब सदस्य और पार्टनर देशों को मिलाकर 21 देशों तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि BRICS का बढ़ता दायरा इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मंच बनाता है। भारत व्यापार और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए सुरक्षित समुद्री रास्ते और मजबूत सप्लाई चेन बेहद जरूरी हैं।

मोदी ने वैश्विक संघर्षों के बीच बातचीत और कूटनीति को समाधान का रास्ता बताते हुए कहा कि विवादों का समाधान संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए ही किया जाना चाहिए।

पुतिन बोले- दुनिया की आर्थिक ताकत का केंद्र बदल रहा

BRICS Business Forum के लीडर्स सेशन में पुतिन ने कहा कि दुनिया में बड़े और गहरे आर्थिक बदलाव हो रहे हैं। 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में वैश्विक विकास को गति देने वाले पुराने आर्थिक केंद्रों की जगह अब नई अर्थव्यवस्थाएं ले रही हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के पास अभी भी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक क्षमता और रिसर्च संस्थान हैं, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार बदल रही है।

पुतिन ने इसी बदलाव का हवाला देते हुए कहा कि कुछ कमजोर हो चुके देश अभी भी खुद को G7 कहते हैं, जबकि BRICS का आर्थिक आकार लगातार बढ़ रहा है।

पजशकियान का डॉलर से दूरी का संकेत

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था कुछ चुनिंदा मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भर है और यह निर्भरता राजनीतिक संकटों से प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि BRICS की असली ताकत सिर्फ उसकी आबादी और अर्थव्यवस्था के आकार में नहीं है। सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और साझा आर्थिक परियोजनाओं को जमीन पर लागू करने से समूह की क्षमता और मजबूत होगी।

रामाफोसा बोले- अफ्रीका के खनिज चाहिए तो निवेश भी करना होगा

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अफ्रीका के प्राकृतिक संसाधनों और निवेश का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अफ्रीका दुनिया को अपने खनिज संसाधन देता रहे और बदले में उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त निवेश न मिले, यह व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती।

रामाफोसा ने BRICS देशों से अफ्रीकी देशों में निवेश बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की अपील की।

मोदी-पुतिन की 45 मिनट बैठक, रूस आने का न्योता

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की।

बैठक में आर्थिक सहयोग कार्यक्रम-2030, व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हुई।

पुतिन ने मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की सहमति से तय की जाएगी।

बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार से भारत मंडपम में लगी औद्योगिक प्रदर्शनी देखने पहुंचे।

मोदी ने पुतिन को भेंट किया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया। तिरुवल्लुवर की यह रचना नैतिक जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े 1,330 दोहों का संग्रह है।

मोदी-पजशकियान की दो सप्ताह में दूसरी मुलाकात

BRICS Summit के दौरान मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच भी द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।

पजशकियान की राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। दोनों नेताओं की करीब दो सप्ताह में यह दूसरी मुलाकात है।

BRICS Business Forum में 2,000 से ज्यादा कारोबारी

BRICS Business Forum में सदस्य और पार्टनर देशों के 2,000 से अधिक कारोबारी नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे अब तक का सबसे बड़ा BRICS Business Forum बताया।

फोरम में गैर-टैरिफ बाधाओं, ग्लोबल वैल्यू चेन, कृषि और एग्री-टेक्नोलॉजी, सर्विस ट्रेड, महिला नेतृत्व वाले कारोबार और डिजिटल इकोनॉमी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। BRICS Business Council की सालाना रिपोर्ट में 44 से अधिक सिफारिशें भी शामिल की गई हैं।

दिल्ली बना इंटरनेशनल डिप्लोमेसी का बड़ा मंच

BRICS Summit के दौरान दिल्ली में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें हुईं। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और पजशकियान के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई प्रमुख नेता भी सम्मेलन में शामिल हुए।

ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भारत की BRICS अध्यक्षता की सराहना की। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ व्यापार, निवेश, स्थानीय मुद्राओं, तकनीक, ऊर्जा और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई।

BRICS Summit 2026 में भारत ने जहां आर्थिक सहयोग और वैश्विक व्यापार को प्राथमिकता दी, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान ने सम्मेलन को पश्चिमी देशों के साथ बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की बहस के केंद्र में ला दिया। BRICS की बढ़ती GDP हिस्सेदारी, सदस्य देशों की बड़ी आबादी और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की मांग यह संकेत देती है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बहुध्रुवीयता का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

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