
Uploaded by Akash Tripathi
सड़क पर गड्ढे व छात्रों के अभिभावकों की गाड़ियों के कारण जाम में फंसे एम्बुलेंस में तड़पता रहा मरीज
पॉवर व पहुंच का पूरा फायदा उठा रहे हैं स्कूल संचालक, ग्राउंड होने के बावजूद नहीं खोलते हैं गेट
हिम्मत से सच कहूं तो बुरा मानते हैं लोग, रो-रो कर मुझमें कहने की आदत नहीं है। इस शहर में ठेकेदार व नेता ही नहीं अधिकारी भी अपना काम बनता और भाड़ में जाए जनता के पैटर्न पर हैं। बात थोड़ी कड़वी जरूर है, मगर सोलह आने सच है। ऐसा इस लिए कह रहे हैं क्योंकि ठेकेदारों को सड़क निर्माण में कमाई दिखाई देती है। जिम्मेदारों की आंख पर कमीशन की पट्टी बंधी रहती है तो स्कूल संचाल अपनी पॉवर व पहुंच का गुरूर में हैं। यही वह तीन ऐसे लोग व संस्थाएं हैं जिनकी वजह से शहर में भीषण जाम लग रहा है। इस जाम में फंसे एम्बुलेंस के अंदर लोगों की जान जाने का खतरा तो बना ही रहता है, बगैर किसी गलती के सैकड़ों लोगों का वक्त भी बर्बाद हो रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि जिले में तैनात अधिकारियों व ठेकेदारों एवं नेताओं और स्कूल संचालकों की यह जुगलबंदी यहां आम आदमी के लिए जाम मुसीबत का सबब बन गया है। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो चले हैं। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और नगर निगम द्वारा खोले गए सीवर के ढक्कर भी कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं। नामी गिरामी स्कूलों के पास पर्याप्त ग्राउंड होने के बावजूद संचालक पढ़ने वाले बच्चों के गार्जियंस की गाड़ियों को आम यात्रियों की परवाह किए बगैर सड़कों पर ही पार्क करा देते हैं। सड़कों पर खड़ी बच्चों के अभिभावकों की गाड़ियों के कारण भीषण जाम लग जाता है। हकीकत जानने के लिए युनाइटेड भारत रिपोर्टर मंगलवार को निकला तो लोक सेवा आयोग से लेकर हिन्दू हास्टल चौराहे तक सड़क पर ठसाठस खड़ी गाड़ियों से जबरदस्त जाम दिखाई दिया। पता करने पर मालूम चला कि बीच में पड़ने वाले स्कूल की छुट्टी हुई है। गार्जियंस बच्चों को लेने के लिए आए हैं। इसी जाम में बम्बुलेंस के अंदर एक मरीज तड़प रहा था। बीच जाम में फंसी एम्बुलेंस तक को निकलने की जगह नहीं मिली। इससे मरीज की जान पर खतरा साफ दिखाई दे रहा था।
सड़क पर पानी में मौत का गड्ढा
किसी सूरत यूनाइटेड भारत का रिपोर्टर बाइक आड़े तिरछे निकालते हुए आगे बढ़ा। तब तक रिमझिम बारिश शुरू हो चुकी थी। बारिश का पानी जगह-जगह सड़कों पर हुए गड्ढों में भरे होने के कारण भी लोगों को निकल पाना मुश्किल हो रहा था। सड़कों की मजबूती पर लोगों को इतना विश्वास नहीं था कि वह पानी से होकर कार या बाइक निकाल लें। क्योंकि पानी में मौत बनकर गड्ढा कहां और कितना गहरा छिपा है। यह समझ पाना मुमकिन नहीं है। खैर इन सब के बावजूद, जिले के अधिकारी चैन की बंशी बजा रहे हैं और पब्लिक आंसू बहा रही है। हालात यही रहे तो किसी भी दिन यह जाम और हालत लोंगे मौत के कारण बन सकते हैं।

मौत को दावत दे रहें गढ्ढें
रिपोर्ट:मुकेश चतुर्वेदी



