
Sawan Last Somwar 2026: सावन का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। आज 24 अगस्त 2026, सोमवार को सावन का आखिरी सोमवार मनाया जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार पर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जो लोग किसी कारणवश व्रत नहीं रख पाते, वे भी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन कर सकते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सावन के आखिरी सोमवार पर पूजा का शुभ मुहूर्त
आज भगवान शिव की पूजा के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:10 बजे तक
- सुबह की पूजा: सुबह 6:00 बजे से 9:15 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक
सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे शुभ योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज सावन के अंतिम सोमवार पर प्रीति योग और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल भी पूजा के लिए विशेष माने जा रहे हैं। ऐसे में शिव भक्त आज श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
शिवलिंग पर जलाभिषेक में क्या चढ़ाएं?
भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सबसे पहले स्वच्छ जल का इस्तेमाल करें। इसके अलावा श्रद्धा के अनुसार शिवलिंग पर पंचामृत भी अर्पित किया जा सकता है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है।
इसके साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद चंदन, फूल, भस्म, भांग और धतूरा अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की सही विधि
सावन के आखिरी सोमवार पर जलाभिषेक करते समय कुछ सामान्य पूजा-विधियों का पालन किया जा सकता है।
सबसे पहले तांबे या स्टील के पात्र को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का पूजन करें। फिर माता पार्वती को जल अर्पित करने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद नंदी और नाग देवता को भी जल अर्पित कर सकते हैं। पूजा के अंत में ‘हर हर महादेव’ और ‘ॐ नमो पार्वती पतये, हर हर महादेव’ का जाप करते हुए भगवान शिव से सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करें।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा के मुहूर्त और विधि में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।


