Vande Mataram Row: नई मुस्लिम लीग बन गई कांग्रेस’… वंदे मातरम् विवाद पर नितिन नवीन का बड़ा हमला

कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने के फैसले पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कांग्रेस का पक्ष रखा।

Vande Mataram Row: वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस कार्य समिति की ओर से पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो छंद गाने के फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के इस निर्णय को लेकर पार्टी पर निशाना साधते हुए उसे ‘नई मुस्लिम लीग’ तक कह दिया। उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के फैसले को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले जहां वंदे मातरम् को लेकर हुए विवाद को महज संयोग बताकर टाल दिया था, वहीं अब उसी मुद्दे को पार्टी की नीति का हिस्सा बना दिया गया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वंदे मातरम् भारत माता की वंदना से जुड़ा गीत है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रभावना जगाने का काम किया था।

उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपने राजनीतिक हितों के लिए राष्ट्र के स्वाभिमान से समझौता कर रही है। इसी क्रम में उन्होंने कांग्रेस को ‘नई मुस्लिम लीग’ करार दिया। भाजपा अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम् के गायन को लेकर दोनों दलों के बीच पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी चल रही है।

विवाद की शुरुआत कांग्रेस कार्य समिति के उस फैसले से हुई, जिसमें पार्टी ने अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद गाने का निर्णय लिया। कांग्रेस ने इसके पीछे 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि वह किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं कर रही, बल्कि उसी निर्णय का पालन कर रही है, जिसके तहत वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों को कांग्रेस के कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रख चुके हैं। खरगे ने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम् गाया है जिसे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी गाते थे। उनका कहना था कि अगर उस गीत को गाना अपराध माना जा रहा है तो फिर उन ऐतिहासिक नेताओं पर भी सवाल उठना चाहिए, जिन्होंने इसे गाया था। खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कई दशक पहले इस विषय पर अपना फैसला लिया था और पार्टी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

कांग्रेस की ओर से यह भी तर्क दिया जा रहा है कि वंदे मातरम् का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ है और इसके अलग-अलग हिस्सों को लेकर ऐतिहासिक संदर्भ मौजूद हैं। पार्टी का कहना है कि उसके कार्यक्रमों में दो छंद गाने का फैसला किसी समुदाय को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि पुराने संगठनात्मक निर्णय के अनुरूप लिया गया है। हालांकि भाजपा इस तर्क को स्वीकार करने के बजाय इसे कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ रही है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रीय प्रतीक है। ऐसे में इसके गायन को सीमित करना राष्ट्रभावना का अपमान है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण ऐसा फैसला लिया है। दूसरी ओर कांग्रेस इस आरोप को राजनीतिक प्रचार बताते हुए अपने पुराने प्रस्ताव और ऐतिहासिक परंपरा का हवाला दे रही है।

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इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण पहलू 15 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से जुड़ा है। उस कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन को लेकर विवाद हुआ था। भाजपा ने उस घटना को भी कांग्रेस के मौजूदा फैसले से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। नितिन नवीन ने संकेत दिया कि जिस मुद्दे को पहले संयोग बताकर नजरअंदाज किया गया, वही अब पार्टी के फैसले के रूप में सामने आया है।

दरअसल, वंदे मातरम् को लेकर विवाद केवल दो छंद या पूरे गीत के गायन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में राष्ट्रवाद, इतिहास, धर्म, राजनीति और वोट बैंक जैसे कई मुद्दे आ गए हैं। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रही हैं। भाजपा जहां इसे राष्ट्रसम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक और संगठनात्मक परंपरा के आधार पर सही ठहरा रही है।

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ऐसे में सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय भावना से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाया जाना चाहिए? लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन वंदे मातरम् जैसे गीत को लेकर बहस करते समय इतिहास और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। भाजपा का ‘नई मुस्लिम लीग’ वाला बयान निश्चित तौर पर राजनीतिक रूप से बेहद आक्रामक है, लेकिन इससे विवाद का समाधान निकलने के बजाय दोनों दलों के बीच दूरी और बढ़ सकती है।

फिलहाल वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक और बयान सामने आने की संभावना है। इतना तय है कि वंदे मातरम् का विवाद अब सिर्फ गीत के गायन का मामला नहीं रहा, बल्कि यह 2026 की राजनीति में राष्ट्रवाद और तुष्टीकरण की बहस का नया केंद्र बन चुका है।

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