Dimagi Naxal Party: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के बाद नया डिजिटल कैंपेन, 24 घंटे में 1.9 लाख फॉलोअर्स

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद सोशल मीडिया पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से अकाउंट चर्चा में आया। जानिए किसने बनाया और क्यों तेजी से बढ़े फॉलोअर्स।

Dimagi Naxal Party: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस के बीच सोशल मीडिया पर एक नया डिजिटल कैंपेन चर्चा में आ गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के बाद अब ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ और ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया अकाउंट सामने आए हैं। इनमें से एक इंस्टाग्राम अकाउंट ने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाकर लोगों का ध्यान खींचा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से बनाए गए एक इंस्टाग्राम अकाउंट ने महज 24 घंटे में करीब 1.9 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए। हालांकि, इस डिजिटल कैंपेन को कौन संचालित कर रहा है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अकाउंट इसी महीने बनाया गया बताया जा रहा है और इसके जरिए राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सवाल उठाने तथा विरोध की बात कही जा रही है।

इस कैंपेन का स्लोगन ‘सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो’ बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच इस नाम से कई अलग-अलग अकाउंट भी सामने आए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन सा अकाउंट इस अभियान का आधिकारिक या मूल पेज है।

एक्स पर ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ के नाम से मौजूद एक हैंडल भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, @DNJP_India नाम का अकाउंट कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल, यूट्यूबर ध्रुव राठी, कॉमेडियन कुणाल कामरा और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई चर्चित लोगों को फॉलो करता है। यह अकाउंट इसी महीने बनाया गया है और इसके संचालक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

इंस्टाग्राम अकाउंट पर अब तक कई पोस्ट साझा किए जा चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अकाउंट का यूजरनेम एक बार बदला भी गया है और यह कई अन्य अकाउंट्स को फॉलो कर रहा है। हालांकि, अकाउंट पर किसी व्यक्ति, राजनीतिक संगठन या समूह के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यही वजह है कि फिलहाल इस कैंपेन को किसी स्थापित राजनीतिक दल से जोड़ना सही नहीं होगा।

इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण के बाद हुई। लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर होने का जिक्र किया और कहा कि देश को अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से भी सतर्क रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने किसी खास संगठन या राजनीतिक दल का नाम लिए बिना ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर सरकार उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहती है तो उन्हें इस पहचान पर गर्व है। उनके बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की व्याख्या करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते या अलगाववादी ताकतों के साथ खड़े होते हैं। रिजिजू ने अनुच्छेद 370 और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े अलगाववादी मुद्दों का भी उल्लेख किया।

इसी राजनीतिक बहस के बीच सोशल मीडिया पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम का कैंपेन तेजी से वायरल होना यह दिखाता है कि राजनीतिक बयान अब सिर्फ पारंपरिक मंचों तक सीमित नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया पर किसी बयान, शब्द या राजनीतिक विवाद को नए नाम और व्यंग्यात्मक अभियानों के जरिए आगे बढ़ाने का चलन लगातार बढ़ रहा है।

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इससे पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP नाम से भी एक सोशल मीडिया अभियान चर्चा में आया था। अब ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से सामने आया कैंपेन उसी तरह के डिजिटल राजनीतिक व्यंग्य का नया उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, इस नए अकाउंट के पीछे कौन है और इसका कोई वास्तविक राजनीतिक संगठन से संबंध है या नहीं, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया कैंपेन दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। एक तरफ बीजेपी नेता प्रधानमंत्री के बयान को राष्ट्रवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक आरोप और असहमति की आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स ने इस विवाद को एक नया डिजिटल मोड़ जरूर दे दिया है।

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