
Vande Mataram Controversy: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का रवैया सम्मानजनक नहीं था। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘वंदे मातरम’ का घोर अनादर बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से देश से माफी मांगने की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है।
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए। बीजेपी का आरोप है कि राष्ट्रगीत के गायन के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी कथित तौर पर आपस में बातचीत करते नजर आए।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश जब स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मना रहा था, उसी समय कांग्रेस मुख्यालय में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसे वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रगीत के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का ध्यान गायन पर नहीं था और वे आपस में बातचीत करते दिखाई दिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी दावा किया कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश अपने राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय भावना को सम्मान दे रहा है, कांग्रेस नेताओं का कथित व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है। बीजेपी नेता ने इसे कांग्रेस की मानसिकता से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
त्रिवेदी ने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है और देश के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में इसके गायन के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या अनादर को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।
इस विवाद में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ की शुरुआती पंक्तियां गाए जाने के बाद सोनिया गांधी कथित तौर पर असहज नजर आईं और गीत को रोकने की बात कही गई। मालवीय के मुताबिक, राहुल गांधी की ओर से भी गीत समाप्त करने का संकेत दिए जाने की बात सामने आई, हालांकि कार्यक्रम में गीत आगे जारी रहा और पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया गया। इन दावों को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ और बीजेपी वीडियो के आधार पर राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी के कार्यक्रम के दौरान किए गए इशारे या बातचीत को राष्ट्रगीत के प्रति कथित अनादर से जोड़ना सही नहीं है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर पार्टी की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में लंबे समय से इसकी शुरुआती पंक्तियां गाई जाती रही हैं। उन्होंने 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में लिए गए निर्णय का उल्लेख किया, जिसमें रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद बैठकों में ‘वंदे मातरम’ की शुरुआती पंक्तियों के गायन की परंपरा का जिक्र किया गया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ। कांग्रेस का कहना है कि पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों दल अपने-अपने पक्ष को सही ठहराने के लिए इतिहास और राष्ट्रगीत से जुड़े संदर्भों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद में एक तरफ बीजेपी कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी और स्पष्टीकरण की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस आरोपों को खारिज करते हुए अपनी परंपरा और ‘वंदे मातरम’ के प्रति सम्मान का हवाला दे रही है। अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दोनों दलों के बयानों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है।



