High Court: कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानें बंद कराने के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’

अमरोहा में सावन के दौरान मांस की दुकानों को बंद कराने के नोटिस को चुनौती दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची की मंशा पर सवाल उठाए।

High Court: सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान अमरोहा में चिकन-मटन की दुकानों को बंद कराने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका की मंशा पर भी सवाल उठाया। अदालत ने टिप्पणी की कि मामला जनहित से ज्यादा ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ से जुड़ा नजर आता है।

क्या था पूरा मामला?

अमरोहा में सावन के दौरान चिकन और मटन की दुकानों को बंद रखने के लिए प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। इन्हीं नोटिस को चुनौती देते हुए अधिवक्ता नासिर फारूक की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि कुछ दुकानों को कांवड़ यात्रा मार्ग से अलग होने के बावजूद बंद कराया गया। याची की ओर से अदालत में कहा गया कि इससे दुकानदारों और मांस कारोबार से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए?

याची की ओर से अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने कोर्ट को बताया कि नोटिस में चार सोमवार को दुकानें बंद रखने की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर पूरे सावन के दौरान चिकन और मटन की दुकानें बंद रखने के लिए दबाव बनाया गया।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि कांवड़ यात्रा के मुख्य मार्ग से अलग गलियों और अन्य इलाकों में मौजूद दुकानों को भी बंद कराया गया। याची ने ऐसे नोटिस को रद्द करने और प्रशासन के निर्देशों में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

सरकार ने याचिका का किया विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से अदालत के सामने अपना पक्ष रखा गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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कोर्ट की ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ वाली टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका दाखिल करने के पीछे की मंशा पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ के बजाय ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ में दाखिल की गई प्रतीत होती है।

अदालत की इस टिप्पणी के बाद याचिका को खारिज कर दिया गया। हालांकि, इस मामले में दुकानदारों की आजीविका और प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को लेकर उठाए गए सवालों ने सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर लागू होने वाले प्रतिबंधों को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

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