Vijay vs Udhayanidhi Stalin: तृषा कृष्णन विवाद के बाद विजय-उदयनिधि में खटास? विधानसभा में CM के लिए नहीं खड़े हुए स्टालिन

कभी एक ही कॉलेज में पढ़े थे विजय और उदयनिधि, अब तमिलनाडु की सियासत में आमने-सामने

Vijay vs Udhayanidhi Stalin: चेन्नई में तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बीच कथित दूरी एक बार फिर चर्चा में आ गई। बुधवार को मुख्यमंत्री विजय जब विधानसभा पहुंचे तो सदन में मौजूद कई नेता और सदस्य उनके स्वागत में खड़े हुए, लेकिन उदयनिधि स्टालिन अपनी सीट पर बैठे रहे। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के पहुंचने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी भी खड़े हुए और उन्होंने विजय का अभिवादन किया। विजय सदन में मौजूद सदस्यों का अभिवादन स्वीकार करते हुए आगे बढ़े। हालांकि, इसी दौरान उदयनिधि स्टालिन का अपनी सीट पर बैठे रहना चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो और तस्वीरों को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

विजय और उदयनिधि स्टालिन के बीच उम्र का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। दोनों के बीच करीब साढ़े तीन साल का अंतर बताया जाता है। राजनीति में आने से पहले दोनों का तमिल सिनेमा से भी गहरा संबंध रहा है। विजय ने मुख्यमंत्री बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उदयनिधि से मुलाकात की थी। उस समय दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को लेकर चर्चा हुई थी।

हालांकि, हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच कथित राजनीतिक और व्यक्तिगत दूरी की चर्चा बढ़ी है। इसकी एक वजह अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर उदयनिधि की कथित टिप्पणी को भी बताया जा रहा है। इस विवाद के बाद विजय और उदयनिधि के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रहने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से रिश्तों में किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

विधानसभा में उदयनिधि के व्यवहार को लेकर विजय समर्थकों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सदन में आने पर विधानसभा की मर्यादा के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने भी कहा कि मुख्यमंत्री का सम्मान किसी व्यक्ति या पार्टी का सम्मान नहीं, बल्कि जनता के जनादेश और संवैधानिक पद का सम्मान है।

दूसरी ओर, उदयनिधि स्टालिन के समर्थकों का कहना है कि किसी नेता का खड़ा होना या नहीं होना अपने आप में राजनीतिक रिश्तों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। विधानसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं। इसलिए इस एक घटनाक्रम के आधार पर दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत दुश्मनी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

विजय और उदयनिधि की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि राजनीति से पहले दोनों का संबंध शिक्षा और फिल्म जगत से रहा है। दोनों ने चेन्नई के लोयोला कॉलेज में पढ़ाई की है। विजय उदयनिधि से सीनियर थे। इसके बाद दोनों का जुड़ाव तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी रहा। उदयनिधि की प्रोडक्शन कंपनी रेड जाइंट मूवीज ने 2008 में विजय की फिल्म ‘कुरुवी’ से फिल्म निर्माण की शुरुआत की थी।

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समय के साथ दोनों का रास्ता बदल गया। विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी टीवीके के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने, जबकि उदयनिधि स्टालिन डीएमके के प्रमुख नेताओं में शामिल होकर विपक्ष की भूमिका में आ गए। इस तरह फिल्म इंडस्ट्री के पुराने परिचित आज तमिलनाडु की राजनीति में एक-दूसरे के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में दोनों नेताओं की बढ़ती भूमिका के बीच विधानसभा का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बना रह सकता है। खासतौर पर तृषा कृष्णन से जुड़े विवाद के बाद दोनों के बीच कथित दूरी की खबरों ने इस घटना को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है। हालांकि, असली तस्वीर तभी साफ होगी जब विजय या उदयनिधि की ओर से इस रिश्ते और विधानसभा की घटना पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आएगी।

फिलहाल इतना जरूर है कि विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के आने पर उदयनिधि स्टालिन का अपनी सीट पर बैठे रहना कैमरों में कैद हो गया और इसके बाद तमिलनाडु की सियासत में दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में दोनों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ता है या फिर पुराने रिश्तों की गर्माहट वापस लौटती है।

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