
Unnao News:निराश्रित और बेसहारा गोवंशों के संरक्षण को लेकर शासन ने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की कवायद शुरू की है। पशुपालन विभाग की पहल पर जारी दिशा-निर्देशों में गो-आश्रय स्थलों के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों के बीच बांट दी गई हैं। अब गोवंशों को पकड़ने से लेकर उनके चारा-पानी, रोशनी, सुरक्षा और चिकित्सा तक की व्यवस्थाएं तय जिम्मेदारियों के अनुसार कराई जाएंगी।
शासन की इस पहल का उद्देश्य सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना और गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। इसके लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
स्थानीय निकायों को मिली गोवंश पकड़ने की जिम्मेदारी
निर्देशों के अनुसार निराश्रित गोवंशों को पकड़कर आश्रय स्थलों तक पहुंचाने का काम नगर विकास और पंचायती राज विभाग के माध्यम से स्थानीय निकाय करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतें और संबंधित निकाय यह जिम्मेदारी निभाएंगे, जबकि शहरी इलाकों में नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
गोवंशों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आश्रय स्थल की भूमि और चारे की भी तय हुई व्यवस्था
गो-आश्रय स्थलों के लिए भूमि की पहचान और उपलब्धता से जुड़े कार्यों में राजस्व, नगर विकास, सिंचाई, मत्स्य, उद्यान, कृषि और ग्राम्य विकास विभाग की भूमिका तय की गई है। वहीं भूमि को आश्रय स्थल के उपयोग योग्य बनाने का दायित्व संबंधित विभागों को सौंपा गया है।
आश्रय स्थलों में पानी की व्यवस्था के लिए सिंचाई, लघु सिंचाई, नलकूप और नगर विकास विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ग्राम्य विकास, पंचायती राज और नगर विकास विभाग सहयोग करेंगे।
सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर विशेष फोकस
गो-आश्रय स्थलों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था में गृह, नगर विकास, पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग की भूमिका निर्धारित की गई है।
शासन ने आश्रय स्थलों पर चौकीदार और केयरटेकर की व्यवस्था करने के साथ गोवंशों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। सभी गोवंशों की टैगिंग और टीकाकरण पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गो-आश्रय स्थलों से आय बढ़ाने की तैयारी
गो-आश्रय स्थलों को भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने पर भी शासन का फोकस है। गोबर से खाद तैयार करने और अन्य मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा देकर आश्रय स्थलों के लिए आय के स्रोत विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया है।
विकासखंड स्तर पर होगी नियमित समीक्षा
निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और भरण-पोषण से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए विकासखंड स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विभागों के बीच समन्वय बनाकर सभी कार्य समयसीमा के भीतर पूरा कराने को कहा गया है।
शासन की नई व्यवस्था से निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त चारा-पानी, चिकित्सा और सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ गो-आश्रय स्थलों के संचालन में भी जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।
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