
संसद के मॉनसून सत्र में दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने के पीछे गृह मंत्रालय की भूमिका थी। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।
‘कार्रवाई का फैसला जिलाधिकारी लेते हैं’
अमित शाह पर राहुल गांधी के आरोपों को लेकर ओपी राजभर ने कहा कि मौके पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई का निर्णय स्थानीय प्रशासन के स्तर पर लिया जाता है। उनके मुताबिक, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित फैसला लेने का अधिकार मौके पर मौजूद जिलाधिकारी के पास होता है।
राजभर ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह इस मामले में गलत बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए है या लगातार प्रदर्शन और हंगामे के लिए।
‘राहुल कोई शेर या बाघ नहीं हैं’
ओपी राजभर ने राहुल गांधी के उस आरोप पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमित शाह उनके सवालों का सामना करने से बच रहे हैं।
राजभर ने कहा कि अमित शाह राहुल गांधी के डर से संसद में आने से नहीं बचेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “राहुल कोई शेर हैं या बाघ हैं कि वो खा जाएंगे?”
उन्होंने कहा कि संसद में बहस और चर्चा होनी चाहिए। अगर सदन में देश के विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी और केवल हंगामा होता रहेगा तो इसका कोई फायदा नहीं है।
राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा जवाब
दरअसल, राहुल गांधी लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अगर गृह मंत्री ने कार्रवाई का आदेश नहीं दिया था तो गृह मंत्रालय में किसने यह फैसला लिया, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए।
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वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद विपक्ष की ओर से हंगामा जारी रहने के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार प्रभावित हो रही है।
अब मॉनसून सत्र के बचे हुए दिनों में यह देखना अहम होगा कि छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होता है या संसद में सियासी टकराव और बढ़ता है।



