Chori Ke Mobile Se Bank Fraud: चोरी के फोन से बैंक अकाउंट में सेंध, मिनटों में उड़ाते थे पैसे; दिल्ली पुलिस ने पकड़ा बड़ा साइबर गैंग

मेरठ, गाजियाबाद और जयपुर तक फैले नेटवर्क का खुलासा, 52 मोबाइल, 145 सिम कार्ड और 70 डेबिट कार्ड बरामद

Chori Ke Mobile Se Bank Fraud: दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो चोरी किए गए मोबाइल फोन के जरिए लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाकर कथित तौर पर पैसे निकाल रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह दिल्ली के अलावा मेरठ, गाजियाबाद और जयपुर तक फैला हुआ था। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा एक चोरी हुए मोबाइल फोन से शुरू हुई जांच के बाद हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक तथा दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

मामला वेस्ट पटेल नगर इलाके का है, जहां 19 मई को एक व्यक्ति का मोबाइल फोन खो गया था। इसके बाद उन्होंने अपना सिम कार्ड दोबारा जारी करवाया। सिम बदलवाने के महज दो दिन बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से हुए तीन अनधिकृत ट्रांजैक्शन के अलर्ट आए। इन तीनों लेनदेन के जरिए कुल 70 हजार रुपये निकाले गए थे। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की जांच शुरू हुई। इस घटना ने जांचकर्ताओं को ऐसे गिरोह तक पहुंचाया, जो कथित तौर पर चोरी किए गए मोबाइल फोन को साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने जांच के लिए दो अलग-अलग टीमें गठित कीं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कोई अकेला अपराधी नहीं बल्कि कई स्तरों पर काम करने वाला एक संगठित नेटवर्क था। गिरोह में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। एक समूह का काम मोबाइल फोन चोरी करना था, जबकि दूसरा समूह कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट, डेबिट कार्ड और अन्य वित्तीय साधनों की व्यवस्था करता था।

जांच में एक तीसरे समूह का भी पता चला, जो जयपुर में कॉल सेंटर जैसे सेटअप से काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इस समूह के सदस्य चोरी किए गए फोन और दूसरे डिजिटल संसाधनों की मदद से पीड़ितों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे। इसके बाद म्यूल बैंक खातों के माध्यम से अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए जाते थे। रकम को जल्दी निकालने के लिए पॉइंट ऑफ सेल यानी POS मशीनों और ऑनलाइन पेमेंट चैनलों का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने सुराग मिलने के बाद जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में कुछ ठिकानों पर छापेमारी की। यहां से कथित तौर पर इस नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटर निखिल सोनी को उसके चार साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को लैपटॉप, टैबलेट और राउटर से लैस एक सक्रिय सेटअप मिला। इसके अलावा कई बैंक पासबुक, पीड़ितों से जुड़ी जानकारी वाली एक निजी डायरी और करीब चार लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।

इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस की दूसरी टीम ने गाजियाबाद और मेरठ में भी कई जगहों पर छापेमारी की। यहां से म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क के लिए कथित तौर पर अकाउंट और अन्य वित्तीय साधन उपलब्ध कराने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इन आरोपियों की पहचान अमर जाटव, हर्ष, मोहन और वाशु के रूप में बताई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इनके जरिए कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल और वित्तीय सामग्री बरामद हुई। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 52 मोबाइल फोन, 145 सिम कार्ड, 70 डेबिट कार्ड और 13 बैंक पासबुक जब्त की गई हैं। इसके अलावा छह POS मशीनें, चार राउटर और छह लैपटॉप व टैबलेट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इन उपकरणों से गिरोह के संचालन, पीड़ितों और पैसों के लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

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जांच में इस सिंडिकेट का संबंध नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 19 शिकायतों से भी सामने आया है। इससे आशंका है कि गिरोह ने केवल एक या दो लोगों को निशाना नहीं बनाया, बल्कि अलग-अलग जगहों पर कई लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी की हो सकती है। पुलिस अब इन शिकायतों और बरामद डिजिटल उपकरणों के बीच कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर मोबाइल फोन चोरी होने के बाद लोग इसे केवल निजी डेटा और फोन की सुरक्षा से जुड़ी समस्या मानते हैं। लेकिन इस मामले ने दिखाया है कि चोरी हुआ फोन बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का जरिया भी बन सकता है। पुलिस की जांच से यह भी पता चला कि साइबर अपराधी अकेले काम करने के बजाय फोन चोरों, फर्जी या म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और तकनीकी ऑपरेटरों के अलग-अलग नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण गिरोह के पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन का पता लगाना है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड किन लोगों के नाम पर थे और उनका इस्तेमाल किन खातों या डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए किया गया। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और मामलों के सामने आने की संभावना है।

Chori Ke Mobile Se Bank Fraud: दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो चोरी किए गए मोबाइल फोन के जरिए लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाकर कथित तौर पर पैसे निकाल रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह दिल्ली के अलावा मेरठ, गाजियाबाद और जयपुर तक फैला हुआ था। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा एक चोरी हुए मोबाइल फोन से शुरू हुई जांच के बाद हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक तथा दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

मामला वेस्ट पटेल नगर इलाके का है, जहां 19 मई को एक व्यक्ति का मोबाइल फोन खो गया था। इसके बाद उन्होंने अपना सिम कार्ड दोबारा जारी करवाया। सिम बदलवाने के महज दो दिन बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से हुए तीन अनधिकृत ट्रांजैक्शन के अलर्ट आए। इन तीनों लेनदेन के जरिए कुल 70 हजार रुपये निकाले गए थे। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की जांच शुरू हुई। इस घटना ने जांचकर्ताओं को ऐसे गिरोह तक पहुंचाया, जो कथित तौर पर चोरी किए गए मोबाइल फोन को साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने जांच के लिए दो अलग-अलग टीमें गठित कीं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कोई अकेला अपराधी नहीं बल्कि कई स्तरों पर काम करने वाला एक संगठित नेटवर्क था। गिरोह में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। एक समूह का काम मोबाइल फोन चोरी करना था, जबकि दूसरा समूह कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट, डेबिट कार्ड और अन्य वित्तीय साधनों की व्यवस्था करता था।

जांच में एक तीसरे समूह का भी पता चला, जो जयपुर में कॉल सेंटर जैसे सेटअप से काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इस समूह के सदस्य चोरी किए गए फोन और दूसरे डिजिटल संसाधनों की मदद से पीड़ितों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे। इसके बाद म्यूल बैंक खातों के माध्यम से अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए जाते थे। रकम को जल्दी निकालने के लिए पॉइंट ऑफ सेल यानी POS मशीनों और ऑनलाइन पेमेंट चैनलों का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने सुराग मिलने के बाद जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में कुछ ठिकानों पर छापेमारी की। यहां से कथित तौर पर इस नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटर निखिल सोनी को उसके चार साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को लैपटॉप, टैबलेट और राउटर से लैस एक सक्रिय सेटअप मिला। इसके अलावा कई बैंक पासबुक, पीड़ितों से जुड़ी जानकारी वाली एक निजी डायरी और करीब चार लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।

इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस की दूसरी टीम ने गाजियाबाद और मेरठ में भी कई जगहों पर छापेमारी की। यहां से म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क के लिए कथित तौर पर अकाउंट और अन्य वित्तीय साधन उपलब्ध कराने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इन आरोपियों की पहचान अमर जाटव, हर्ष, मोहन और वाशु के रूप में बताई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इनके जरिए कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल और वित्तीय सामग्री बरामद हुई। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 52 मोबाइल फोन, 145 सिम कार्ड, 70 डेबिट कार्ड और 13 बैंक पासबुक जब्त की गई हैं। इसके अलावा छह POS मशीनें, चार राउटर और छह लैपटॉप व टैबलेट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इन उपकरणों से गिरोह के संचालन, पीड़ितों और पैसों के लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

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जांच में इस सिंडिकेट का संबंध नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 19 शिकायतों से भी सामने आया है। इससे आशंका है कि गिरोह ने केवल एक या दो लोगों को निशाना नहीं बनाया, बल्कि अलग-अलग जगहों पर कई लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी की हो सकती है। पुलिस अब इन शिकायतों और बरामद डिजिटल उपकरणों के बीच कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर मोबाइल फोन चोरी होने के बाद लोग इसे केवल निजी डेटा और फोन की सुरक्षा से जुड़ी समस्या मानते हैं। लेकिन इस मामले ने दिखाया है कि चोरी हुआ फोन बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का जरिया भी बन सकता है। पुलिस की जांच से यह भी पता चला कि साइबर अपराधी अकेले काम करने के बजाय फोन चोरों, फर्जी या म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और तकनीकी ऑपरेटरों के अलग-अलग नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण गिरोह के पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन का पता लगाना है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड किन लोगों के नाम पर थे और उनका इस्तेमाल किन खातों या डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए किया गया। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और मामलों के सामने आने की संभावना है।

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