अधीनता की वेदी पर स्वतंत्रता का हवन करने वाले क्रांतिकारियों को सलाम

Salute to the revolutionaries who sacrificed freedom on the altar of subjugation.

ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद स्थित मलका जेल में दी गई थी फांसी
इलाहाबाद संग्रहालय की आजाद वीथिका क्रांतिकारियों के बलिदानों का प्रमाण हैं

दिन रविवार तारीख 9 अगस्त 2026 को  काकोरी ट्रेन एक्शन  के सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह वहीं एक्शन है जिसमेें क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की अधीनता की वेदी पर स्वतंत्रता का हवन किया। स्वतंत्रता का हवन कर इसे अंजाम तक पहुंचाया। इसमे कुछ नामचीन तो कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। काकोरी ट्रेन एक्शन  और क्रांतिकारियों के बलिदानों को बयां करती रिपोर्ट….
चंद्रशेखर आजाद ने किया था नेतृत्व
काकोरी ट्रेन एक्शन ने अंग्रेजों को आर्थिक तौर पर काफी कमजोर किया था। इस एक्शन की योजना हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने बनाई थी। इन्हीं के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने एक्शन को अंजाम दिया।काकोरी एक्शन को अंजाम देने वालों में पं.राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्लाह खान और राजेंद्र लाहिड़ी ने अहम भूमिका नभाई थी। इन्होंने लखनऊ से सहारनपुर की ओर जाने वाली पसिंजर ट्रेन को काकोरी स्टेशन पर लूटा। जिसे काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम जाना जाता है। इस पसिंजर की बोगियां अंग्रेजों के धन और किमती आभूषणों से भरी थी।

क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन एकत्रित करना
इस एक्शन को अंजाम देने के पीछे मात्र एक ही लक्ष्य था। क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन एकत्रित करना और उसे देश की आजादी के लड़ रहे क्रांतिकारियों तक पहुंचाना। इस एक्शन ने अंग्रेजों को आर्थिक तौर क्षति पहुंचाई, जिससे अंग्रेज काफी क्रुधित हुए। जिसके बाद उन्होंने कुल 40 क्रांतिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर दिया। जिनमे से एक्शन में मुख्य भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों में से एक को 17 और तीन को 19 दिसंबर 1927 का प्रदेश की अलग-अलग जेलों में फांसी दी गई थी। जिसमे 17 दिसंबर 1927 को राजेंद्र लाहिड़ी को गोंडा जेल में और 19 दिसंबर 1927 को ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद की मलका जेल में, राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में और अशफाक उल्ला खान को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई थी।

शहीद ठाकुर रोशन सिंह

आज भी मौजूद हैं इसके प्रमाण
इतिहास विशेषज्ञ डॉ.सुशील शुक्ला बताते है कि काकोरी ट्रेन एक् शन का प्रमाण आज भी इलाहाबाद संग्रहालय स्थित आजाद वीथिका में दर्ज हैं। इस वीथिका के माध्यम से काकोरी ट्रेन एक्शन को अंजाम देने वाले क्रांतिकारियों के कार्य का उल्लेख उनकी फोटो के साथ किया गया हैं। जिससे की नई पीढ़ी अपने स्वर्ण कालीन इतिहास से मुखातिब होती रहें। इसी के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी इस स्वर्ण कालीन इतिहास से मुतासिर करती रहें।

काकोरी ट्रेन एक्शन ने अंग्रेजों को आर्थिक क्षति पहुंंचाई थी। इस घटना को अंजाम देने के पीछे मकसद था क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन एकत्रित करना। इस एकत्रित को क्रांतिकारियों तक पहुंचा अंग्रेजों के खिलाफ इस्तेमाल करना। इलाहाबाद संग्रहालय स्थित आजाद वीथिका इसका प्रमाण हैं।
डॉ.सुशील शुक्ला
इतिहास विशेषज्ञ

रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी

 

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