
JPSC Movement:झारखंड में जेपीएससी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में है। शनिवार को हजारीबाग निवासी और इंग्लिश ऑनर्स में एमए के छात्र रवि कुमार ने जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचकर आंदोलनरत अभ्यर्थियों का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए।
रवि कुमार ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को आंदोलन और आमरण अनशन जैसे कदम उठाने की स्थिति में पहुंचना चिंताजनक है। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को नियमित करने को लेकर कई वादे किए गए थे, लेकिन अब अभ्यर्थियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
रोजगार के मुद्दे पर सरकार पर तंज
रवि कुमार ने कहा कि चुनाव के दौरान जेपीएससी की परीक्षाओं को नियमित कराने और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को तय समय पर आयोजित कराने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि सरकार बनने के बाद रोजगार के सवाल पर युवाओं को नौकरी के बजाय स्वरोजगार के विकल्प बताए गए।
उन्होंने सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर युवाओं को रोजगार के लिए इसी तरह आंदोलन करना पड़ा तो आने वाले समय में जयपाल सिंह स्टेडियम में और भी टेंट लगाने पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक, सरकार को फिर इन्हीं टेंटों में युवाओं को मुर्गी पालन, बकरी पालन और सूअर पालन का प्रशिक्षण देना पड़ेगा।
स्टेडियम में लगाए गए दो टेंट
फिलहाल आंदोलन के लिए जयपाल सिंह स्टेडियम में दो टेंट लगाए गए हैं, जहां अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। रवि कुमार ने कहा कि यह केवल जेपीएससी परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ा विषय है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा कि सरकार को चुनाव के दौरान किए गए वादों को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवाल
रवि कुमार के मुताबिक, जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का नियमित और समयबद्ध आयोजन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक परीक्षाएं नहीं होने या प्रक्रिया में देरी होने से युवाओं की तैयारी और करियर दोनों प्रभावित होते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर स्पष्ट किया जाए और अभ्यर्थियों को समय पर परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।



