
Ajinkya Rahane Retirement: पूर्व भारतीय टेस्ट कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे रहाणे ने आखिरकार अपने 15 साल के अंतरराष्ट्रीय सफर को विराम देने का फैसला किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए फैंस को अपने फैसले की जानकारी दी। इस घोषणा के बाद क्रिकेट प्रेमियों के बीच भावुक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
वीडियो में रहाणे ने कहा कि अब आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का सही समय आ गया है। उन्होंने कहा कि जीवन का नियम है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और समय आने पर उसे स्वीकार करना चाहिए। रहाणे ने अपने पूरे करियर में मिले प्यार और समर्थन के लिए क्रिकेट प्रशंसकों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था और भारतीय टीम की जर्सी पहनना उनके लिए गर्व की बात रही। रहाणे ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने क्रिकेट को अपना सबकुछ दिया। कई बार असफलताएं मिलीं, लेकिन फैंस के दिलों में जो जगह मिली, उसे कोई नहीं छीन सकता। अपने संदेश का समापन उन्होंने “कैप नंबर 278, अलविदा” कहकर किया।
अजिंक्य रहाणे ने साल 2011 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया था। इसके बाद वह लगातार टीम से बाहर रहे। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें भारतीय टीम में दोबारा मौका नहीं मिल सका। आखिरकार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया।
रहाणे का टेस्ट करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट मैचों में 5077 रन बनाए। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 38.46 रहा। उनके नाम 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। विदेशी परिस्थितियों में उनकी बल्लेबाजी हमेशा टीम इंडिया की बड़ी ताकत मानी जाती रही।
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रहाणे का सबसे यादगार योगदान 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में देखने को मिला। नियमित कप्तान की अनुपस्थिति में उन्होंने टीम की कमान संभाली और ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर ऐतिहासिक सीरीज में मात दिलाई। मेलबर्न टेस्ट में उनकी कप्तानी और शतक भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे पलों में गिने जाते हैं। उनकी शांत नेतृत्व शैली और दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद खिलाड़ी बनाया।
हालांकि वनडे और टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी पहचान एक भरोसेमंद बल्लेबाज और संकटमोचक खिलाड़ी के रूप में बनी। अपने पूरे करियर में उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और टीम इंडिया की कई ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
अजिंक्य रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। मैदान पर उनका शांत स्वभाव, कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता और टीम के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में हमेशा यादगार बनाए रखेगा।



