
UNSC Reform: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया अब कुछ मुट्ठी भर देशों के संकीर्ण और विभाजनकारी हितों की बंधक बनकर नहीं रह सकती। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान समय की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वकारी और प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में सुरक्षा परिषद सुधारों पर चल रही अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) को 81वें सत्र तक आगे बढ़ाने के निर्णय के दौरान भारत ने सुधार प्रक्रिया की धीमी गति पर गहरी निराशा व्यक्त की। भारत ने प्रस्ताव पर आम सहमति का समर्थन किया, लेकिन यह भी कहा कि वर्षों से जारी चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका है।
अपने संबोधन में राजदूत पी. हरीश ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार आत्मा मोक्ष प्राप्त करने से पहले जन्म और मृत्यु के अनेक चक्रों से गुजरती है, उसी प्रकार सुरक्षा परिषद सुधारों की वार्ता भी अब तक 17 दौर पूरे कर चुकी है, लेकिन अभी तक किसी सार्थक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने कहा कि अब यह प्रक्रिया 18वें वर्ष में प्रवेश कर रही है और लगातार हो रही देरी संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े कर रही है।
भारत ने दोहराया कि इस गतिरोध को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका समयबद्ध टेक्स्ट-बेस्ड वार्ता है। भारत का मानना है कि केवल औपचारिक चर्चाओं से आगे बढ़कर लिखित मसौदे पर आधारित बातचीत ही सुरक्षा परिषद सुधारों को अंतिम रूप देने का रास्ता खोल सकती है।

इस दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अन्य महत्वपूर्ण मंचों पर भी अपनी वैश्विक प्राथमिकताओं को सामने रखा। महासभा की पूर्ण बैठक में न्यू अर्बन एजेंडा की मध्यावधि समीक्षा के दौरान भारत ने सतत शहरी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय प्रतिनिधि ने स्मार्ट सिटीज मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
वहीं सुरक्षा परिषद की त्रैमासिक खुली बहस में मध्य पूर्व की स्थिति पर बोलते हुए भारत ने लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल के हमलों की कड़ी निंदा की। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। साथ ही गाजा में जारी मानवीय संकट पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।



