
Hyperprolactinemia and Pregnancy: कई बार दंपति लंबे समय तक संतान प्राप्ति की कोशिश करते हैं, लेकिन बार-बार असफलता मिलने के बावजूद सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आती हैं। ऐसे मामलों में समस्या की सही वजह पता लगाना चुनौती बन जाता है। हाल ही में एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ ने ऐसा ही एक मामला साझा किया, जिसमें पति-पत्नी दोनों की शुरुआती जांच सामान्य होने के बावजूद तीन साल तक गर्भधारण नहीं हो सका। बाद में एक विशेष हार्मोन जांच से असली कारण सामने आया।
तीन साल से कर रहे थे संतान की कोशिश
फर्टिलिटी विशेषज्ञ के अनुसार, करीब 30 वर्ष की उम्र का एक दंपति शादी के चार साल बाद भी संतान सुख से वंचित था। पिछले तीन वर्षों से वे प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की कोशिश कर रहे थे और कई बार उपचार भी करा चुके थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
महिला की फैलोपियन ट्यूब्स खुली हुई थीं, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामान्य थी और पति की जांच में भी कोई समस्या नहीं मिली। शुरुआती सभी रिपोर्ट सामान्य होने के कारण दंपति यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर गर्भधारण क्यों नहीं हो रहा।
तीन बार IUI कराने के बाद भी नहीं मिली सफलता
डॉक्टर ने बताया कि दंपति तीन बार इंट्रायूटेरिन इंसेमिनेशन (IUI) प्रक्रिया भी करवा चुका था, लेकिन हर बार परिणाम निराशाजनक रहा। लगातार असफलता के कारण दोनों मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे, जबकि परिवार के लोग इसका कारण केवल तनाव को मान रहे थे।
कुछ महीनों में नहीं हो रहा था ओव्यूलेशन
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण बात सामने आई। कुछ महीनों में महिला के फॉलिकल्स सामान्य रूप से विकसित हो रहे थे, जबकि कुछ महीनों में अंडोत्सर्जन (Ovulation) ही नहीं हो रहा था। इसी कारण दो से तीन बार IUI साइकिल भी बीच में रद्द करनी पड़ी, क्योंकि अंडाणु पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रहे थे।
यहीं से डॉक्टर को हार्मोन संबंधी समस्या का संदेह हुआ।
हार्मोन टेस्ट से खुला राज
इसके बाद विशेषज्ञ ने महिला को एक अतिरिक्त हार्मोन टेस्ट कराने की सलाह दी। जांच रिपोर्ट में हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया (Hyperprolactinemia) की पुष्टि हुई।
यह ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह हार्मोन मुख्य रूप से स्तनपान के दौरान दूध बनने में मदद करता है, लेकिन यदि गर्भधारण से पहले इसका स्तर बढ़ जाए तो यह अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
क्यों बनता है गर्भधारण में बाधा?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर कई महिलाओं में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकता है। इससे—
- नियमित ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है।
- मासिक धर्म चक्र अनियमित हो सकता है।
- गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।
- बार-बार IUI या अन्य फर्टिलिटी उपचार असफल हो सकते हैं।
अनुमान है कि अनियमित ओव्यूलेशन या बांझपन की समस्या से जूझ रही लगभग 15 से 20 प्रतिशत महिलाओं में प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है।
समय पर इलाज से मिल सकती है राहत
रिपोर्ट आने के बाद महिला का इलाज शुरू किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मामलों में दवाओं की मदद से प्रोलैक्टिन हार्मोन को नियंत्रित किया जा सकता है। हार्मोन का स्तर सामान्य होने के बाद कई महिलाओं में ओव्यूलेशन दोबारा नियमित हो जाता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।
कब करानी चाहिए यह जांच?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि—
- एक वर्ष या उससे अधिक समय तक गर्भधारण न हो रहा हो (या 35 वर्ष से अधिक उम्र में 6 महीने तक प्रयास के बाद भी सफलता न मिले),
- बार-बार IUI या अन्य फर्टिलिटी उपचार असफल हो रहे हों,
- मासिक धर्म अनियमित हो,
- ओव्यूलेशन बार-बार प्रभावित हो रहा हो,
तो डॉक्टर की सलाह पर प्रोलैक्टिन समेत अन्य हार्मोन की जांच कराई जा सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अल्ट्रासाउंड या सामान्य जांच के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। यदि गर्भधारण में लगातार कठिनाई आ रही है, तो हार्मोनल जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। सही समय पर सही कारण की पहचान होने से उपचार आसान हो सकता है और सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। यदि आपको गर्भधारण में कठिनाई या हार्मोन संबंधी कोई समस्या है, तो किसी योग्य स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।



