
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram के कॉपीराइट सिस्टम के कथित दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक संगठित नेटवर्क फर्जी Copyright Strike का इस्तेमाल कर कंटेंट क्रिएटर्स के अकाउंट सस्पेंड या डिसेबल करवाता है और बाद में शिकायत वापस लेने के बदले पैसे मांगता है।
याचिका कंटेंट क्रिएटर नीतिन जोशी की ओर से दायर की गई है। इसमें पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, कुछ लोग कथित तौर पर बॉट या फर्जी अकाउंट्स के जरिए किसी कंटेंट क्रिएटर के खिलाफ लगातार Copyright Infringement की शिकायतें दर्ज कराते हैं। आरोप है कि इन शिकायतों के बाद Instagram की ऑटोमैटेड कॉपीराइट कार्रवाई शुरू हो जाती है, जिससे कुछ मामलों में अकाउंट अस्थायी रूप से सस्पेंड या डिसेबल हो सकता है।
इसके बाद, याचिका के मुताबिक, कथित नेटवर्क पीड़ित क्रिएटर से संपर्क कर शिकायत वापस लेने के बदले बड़ी रकम की मांग करता है। याचिकाकर्ता ने इसे एक नए प्रकार का साइबर एक्सटॉर्शन बताया है।
याचिकाकर्ता ने क्या दावा किया?
नीतिन जोशी का कहना है कि उन्होंने “Instagram का सबसे बड़ा Copyright Scam” शीर्षक से एक वीडियो प्रकाशित किया था। उनके अनुसार, इसके बाद कई अन्य कंटेंट क्रिएटर्स ने भी उनसे संपर्क कर फर्जी Copyright शिकायतों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो प्रकाशित होने के कुछ समय बाद उनके वीडियो को Copyright शिकायत के आधार पर ब्लॉक कर दिया गया। उनका दावा है कि यह दिखाता है कि रिपोर्टिंग सिस्टम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा सकता है।
क्या वास्तव में फर्जी शिकायत से अकाउंट तुरंत बंद हो जाता है?
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष या न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है कि सिर्फ एक फर्जी Copyright शिकायत के आधार पर Instagram अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है। यह पूरा मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।
Meta की नीतियों के अनुसार, कॉपीराइट शिकायतों की समीक्षा के लिए प्रक्रिया मौजूद है और उपयोगकर्ताओं को कई मामलों में अपील या काउंटर-नोटिफिकेशन का विकल्प भी दिया जाता है। हालांकि, याचिका में आरोप है कि ऑटोमैटेड सिस्टम का कुछ लोग कथित रूप से दुरुपयोग कर रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
इस मामले की सुनवाई पहले 15 जुलाई को होनी थी, लेकिन एक न्यायाधीश के मामले से अलग होने के बाद अब 28 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है। अदालत में सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले की जांच के लिए SIT गठित की जाएगी या नहीं।
फिलहाल यह मामला अदालत में लंबित है। याचिका में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अदालत ने अभी तक इन दावों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।



