
International News: ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि यदि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले महीने हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, तो ईरान भी उसी के अनुरूप जवाबी कदम उठाएगा।
बेलारूस के संसद अध्यक्ष इगोर सर्गेयेन्को के साथ बैठक के दौरान गालिबाफ ने कहा कि ईरान समझौते की सभी शर्तों को लागू कराने के लिए पूरी मजबूती से प्रयास करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका और “जायोनी शासन” यानी इजरायल अपने वादों से पीछे हटते हैं, तो तेहरान भी अपनी रणनीति बदलने में देर नहीं करेगा।
‘अमेरिका ईरान का सैन्य रूप से सामना नहीं कर सकता’
गालिबाफ ने दावा किया कि हालिया घटनाक्रम के बाद अमेरिका यह समझ चुका है कि वह ईरान का सैन्य रूप से सामना करने की स्थिति में नहीं है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय तनाव के बीच एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
समझौते में इजरायल की भूमिका नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते की बातचीत में इजरायल की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समझौते की कई शर्तों से असहमति जता चुके हैं।
इजरायल का मानना है कि इस समझौते से उसके प्रमुख सुरक्षा उद्देश्य पूरे नहीं होते, जिनमें ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाना प्रमुख है।
क्षेत्र में बढ़ सकता है तनाव
ईरान के ताजा बयान से संकेत मिलते हैं कि यदि समझौते के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद बढ़ते हैं, तो पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहरा सकता है। फिलहाल अमेरिका और इजरायल की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



