
UP sonbhadra News: जिले में प्रस्तावित पम्प स्टोरेज पावर (PSP) परियोजनाओं के विरोध में मंगलवार को सैकड़ों आदिवासी महिला-पुरुषों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपते हुए मांग की कि पहले वनाधिकार कानून, 2006 के तहत आदिवासी समुदाय को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जाए, उसके बाद ही किसी भी परियोजना पर निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना था कि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए ओबरा और सदर तहसील क्षेत्र की करीब साढ़े तीन हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। उनका दावा है कि इससे कई गांव प्रभावित होंगे और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान होगी, जिससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।
“वनाधिकार पहले, परियोजना बाद में”
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए ड्रोन के माध्यम से चिरौंजी के बीजारोपण जैसे अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पावर परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्यावरण संरक्षण और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान दोनों साथ-साथ कैसे संभव हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि वनाधिकार कानून, 2006 के तहत आज भी अनेक आदिवासी परिवारों को उनके कब्जे वाली जमीन का वैधानिक अधिकार नहीं मिला है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भूमि अधिग्रहण से उनके सामने भूमिहीन होने का खतरा पैदा हो गया है।
वन विभाग के अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे ज्ञापन में वन विभाग के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। ज्ञापन में दावा किया गया कि वन संरक्षण से जुड़े नियमों और वर्ष 2024 के शासनादेश का पालन किए बिना बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किए जा रहे हैं।
ज्ञापन में पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा कथित अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
“जंगल हमारी पहचान और विरासत हैं”
प्रदर्शन के दौरान कई आदिवासी प्रतिनिधियों ने परियोजनाओं का विरोध करते हुए अपने विचार रखे।
कन्हैया चेरो ने कहा कि किसी भी कीमत पर पावर कंपनी स्थापित नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक ले जाया जाएगा।
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बिंदु अगरिया ने आरोप लगाया कि पावर परियोजनाओं से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और आदिवासी समुदाय के जंगल, जमीन तथा प्राकृतिक अधिकार प्रभावित होंगे।
राम बहाल ने कहा कि जंगल और पेड़ उनके पूर्वजों की विरासत हैं तथा उनकी रक्षा करना उनका दायित्व है। वहीं रामसेवक ने कहा कि कोरोना काल में इसी क्षेत्र के जंगलों और स्वच्छ वातावरण ने लोगों को राहत दी थी। उनका मानना है कि भविष्य में हरियाली का महत्व और बढ़ेगा, इसलिए जंगलों को बचाना जरूरी है।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने आदिवासियों की मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो पर्यावरण संरक्षण, जंगल बचाने और वनाधिकार लागू कराने को लेकर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का कहना है कि आंदोलन गांवों से लेकर जिला मुख्यालय, लखनऊ और दिल्ली तक चलाया जाएगा।
प्रदर्शन में बिंदु खरवार, गोपीनाथ चेरो, मुखलाल चेरो, गुलाब चेरो, बासमती गोंड, दीपक गोंड, दिनेश माझी, गुलाब बैगा, राजेश पनिका सहित बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष मौजूद रहे।
(रिपोर्ट: रवि पाण्डेय, सोनभद्र)



