
Sonbhadra Crime News: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसकी जड़ें भारत से लेकर दुबई तक फैली हुई थीं। महज 25.03 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत से शुरू हुई जांच ने 500 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का खुलासा कर दिया। पुलिस का दावा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ यह रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इस मामले में लखनऊ से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा लविश चौधरी बताया जा रहा है। उसके खिलाफ देश के कई राज्यों में साइबर ठगी के मुकदमे दर्ज हैं। अब उसे भारत लाने के लिए इंटरपोल के माध्यम से कानूनी कार्रवाई तेज की जा रही है।
पुलिसकर्मी से 25 लाख की ठगी से खुला बड़ा नेटवर्क
मामले की शुरुआत तब हुई जब चोपन थाना में तैनात पुलिसकर्मी दीपक कुमार ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार उन्हें Botbro, Crossmarket और MineCrypto जैसे ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर हर महीने 8 से 10 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया गया।
शुरुआत में निवेश पर कुछ राशि लौटाकर उनका विश्वास जीता गया, लेकिन जैसे ही उन्होंने बड़ी रकम निवेश की, पूरा पैसा गायब कर दिया गया। कुल 25 लाख 03 हजार रुपये की साइबर ठगी के बाद मामला साइबर क्राइम थाना पहुंचा।
मनी ट्रेल से लखनऊ तक पहुंची पुलिस
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में साइबर थाना, स्वाट टीम और तकनीकी विशेषज्ञों ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और मनी ट्रेल की गहन जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से पूरे नेटवर्क में घुमाई जा रही थी। मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस लखनऊ पहुंची और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी
- सुफियान पुत्र इजराइल खान, निवासी बद्रीनगर नादरगंज, अमौसी, थाना सरोजनीनगर, लखनऊ
- मोहम्मद दानिश पुत्र अजमेर अली, निवासी रहीमनगर, थाना महानगर, लखनऊ
- अरशद सिद्दीकी पुत्र जावेद इकबाल, निवासी ब्रह्मनगर, थाना हसनगंज, लखनऊ
- तुफैल खान पुत्र इजराइल खान, निवासी बद्रीनगर नादरगंज, अमौसी, थाना सरोजनीनगर, लखनऊ
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक चार पहिया वाहन बरामद किया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और अन्य आरोपियों की पहचान की जा सके।
दुबई में बैठा था मास्टरमाइंड
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि जांच में अब तक करीब 500 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए हैं। शुरुआती अनुमान है कि यह रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
पुलिस के अनुसार पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई में बैठा लविश चौधरी करता था। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, तेलंगाना और अन्य राज्यों में पहले से साइबर अपराध के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है और इंटरपोल के माध्यम से उसे भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सोशल मीडिया से बनाता था भरोसा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया पर अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल का प्रदर्शन करता था। महंगी कारों, आलीशान घरों, बड़े आयोजनों और नामी हस्तियों के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा कर लोगों का विश्वास जीतता था।
पुलिस के अनुसार उसने दुबई में “नबाब” नाम से एक क्रिकेट टीम भी बना रखी थी। उसकी इसी चमक-दमक से प्रभावित होकर लोग उसे सफल कारोबारी मान लेते थे और बड़ी रकम निवेश कर देते थे।
UP Sonbhadra News: भीषण गर्मी से राहत के लिए दिशिता महिला मंडल रेनुसागर की सराहनीय पहल
ऐसे देता था निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। शुरुआत में निवेशकों को समय पर ब्याज और मुनाफा देकर उनका विश्वास मजबूत किया जाता था। जब निवेशक बड़ी रकम लगाने लगते थे, तब उनके भुगतान अचानक रोक दिए जाते थे।
इसके बाद निवेशकों के अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते और उनकी पूरी रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस का मानना है कि इसी तरीके से देशभर के हजारों लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया।
लोगों से पुलिस की अपील
सोनभद्र साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश या क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और नियामकीय स्थिति की अच्छी तरह जांच करें। केवल अधिक मुनाफे के लालच में निवेश करना भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा देश के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
(रिपोर्ट: रवि पाण्डेय, सोनभद्र)



