अमेरिकी अदालत से अडानी परिवार को बड़ी राहत, गौतम और सागर अडानी पर लगे आरोप खारिज

गौतम अडानी और सागर अडानी को अमेरिकी अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी सरकारी वकीलों ने अदालत को बताया कि दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले।

इसके बाद अदालत ने मामले को खारिज करने का आदेश दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह केस अब दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।

अमेरिकी न्याय विभाग ने बंद की कार्रवाई

अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले की समीक्षा के बाद फैसला लिया कि इस केस पर अब आगे संसाधन खर्च नहीं किए जाएंगे। अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा गया कि कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह निर्णय लिया गया है।

हाल के दिनों में अडानी समूह से जुड़ी कई रेगुलेटरी जांचें भी बंद हो चुकी हैं।

SEC ने भी सिविल मामले का किया निपटारा

इससे पहले अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारत के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामले में लगाए गए सिविल आरोपों का निपटारा किया था।

कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार गौतम अडानी ने 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी ने 12 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई थी। हालांकि दोनों ने किसी भी गलत काम को स्वीकार नहीं किया।

OFAC मामले में भी हुआ समझौता

अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने भी ईरान से LPG आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले का निपटारा किया था।

इस मामले में अडानी समूह ने 275 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई थी।

अमेरिका में निवेश की तैयारी

अडानी परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने पिछले महीने कहा था कि उनके क्लाइंट अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर तक का निवेश करना चाहते हैं। हालांकि केस लंबित होने की वजह से योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

2024 में दर्ज हुआ था मामला

अमेरिकी न्याय विभाग और SEC ने 2024 के अंत में अडानी परिवार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी की साजिश रची गई।

साथ ही अमेरिकी निवेशकों और कर्जदाताओं से जानकारी छिपाने के आरोप भी लगाए गए थे।

लंबी समीक्षा के बाद आया फैसला

रिपोर्ट्स के अनुसार जांच एजेंसियों को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त अमेरिकी जुड़ाव और ठोस सबूत नहीं मिले। इसके बाद केस धीरे-धीरे अडानी परिवार के पक्ष में जाता दिखा।

यह फैसला महीनों चली कानूनी समीक्षा और बातचीत के बाद लिया गया।

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