17 मई से शुरू होने जा रहा पुरूषोत्तम मास, एक माह तक थम जाएंगे शुभ कार्य

Purushottam month is going to start from 17th May, auspicious works will be stopped for a month.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 17 मई से पुरुषोत्तम मास यानी मलमास की शुरुआत होने जा रही है। यह पवित्र महीना पूरे एक महीने तक चलेगा। ज्योतिषाचार्यों और धर्माचार्यों के मुताबिक इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। वहीं भगवान विष्णु की विशेष पूजा, जप-तप और दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार जब किसी चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती, तब उस अतिरिक्त महीने को पुरुषोत्तम मास या मलमास कहा जाता है। यह लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए पूजा-पाठ और दान से विशेष पुण्य प्राप्त होता है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं। आचार्य उदित नारायण त्रिपाठी के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए।

इसी कारण 17 मई से अगले एक महीने तक विवाह समारोह, सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यापार का शुभारंभ, मुंडन संस्कार और यज्ञोपवीत जैसे आयोजन नहीं किए जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह समय सांसारिक सुखों की बजाय आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए लोग इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, व्रत और भगवान की भक्ति में अधिक समय बिताते हैं।
आचार्य निधिष द्विवेदी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस महीने में श्रीहरि विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण, गीता पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कई श्रद्धालु पूरे महीने व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं।

धर्माचार्यों के मुताबिक पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व होता है। इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराना, गरीबों को कपड़े दान देना और पीतल के बर्तन दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा गौसेवा, जल सेवा और धार्मिक स्थलों पर सहयोग करने से भी पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए परोपकारी कार्य कई गुना फल देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। पुरुषोत्तम मास शुरू होते ही मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की संख्या बढ़ने लगेगी। विष्णु मंदिरों में विशेष सजावट और आरती का आयोजन होगा। सुबह-शाम भजन-कीर्तन और सत्संग के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कई श्रद्धालु गंगा स्नान, तीर्थ यात्रा और कथा-कीर्तन में भाग लेकर इस महीने को पुण्यदायी बनाने का प्रयास करेंगे।

धार्मिक संस्थाओं द्वारा जरूरतमंदों के लिए भंडारे और सेवा कार्य भी चलाए जाएंगे। धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषोत्तम मास केवल शुभ कार्यों के निषेध का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है। यह महीना लोगों को संयम, सेवा और भक्ति का संदेश देता है। इसी वजह से श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे इस दौरान क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहें तथा अधिक से अधिक समय ईश्वर भक्ति और समाज सेवा में लगाएं।17 मई से शुरू होने वाला यह पावन महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा, वहीं दूसरी ओर पूजा-पाठ, दान और सेवा के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी

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