
National News: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से एक ऐसी अपील की है, जिसने आर्थिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। हैदराबाद में करीब 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें। उन्होंने इसे कोई कानूनी पाबंदी नहीं, बल्कि देशहित में की गई एक नैतिक अपील बताया।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर सरकार सोना खरीदने से बचने की सलाह क्यों दे रही है? क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा संकट मंडरा रहा है? दरअसल, इसके पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारत पर बढ़ता विदेशी मुद्रा दबाव बताया जा रहा है।
इन दिनों पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए संकट के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसके लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार उन खर्चों को कम करना चाहती है, जो फिलहाल टाले जा सकते हैं।
भारत में सोना केवल गहना नहीं, बल्कि निवेश और परंपरा का हिस्सा माना जाता है। खासकर शादी-ब्याह और त्योहारों में सोने की खरीदारी बड़े स्तर पर होती है। लेकिन आर्थिक नजरिए से देखा जाए तो सोना और कच्चा तेल भारत के सबसे बड़े आयात उत्पादों में शामिल हैं। जब देश बड़ी मात्रा में सोना खरीदता है, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और रुपये की स्थिति कमजोर हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि तेल तो उद्योगों और परिवहन के लिए जरूरी है, लेकिन सोने की खरीदारी कुछ समय के लिए टाली जा सकती है। उन्होंने लोगों से इसे देश सेवा की भावना से देखने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, अनावश्यक यात्राओं से बचने और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाने की भी सलाह दी।
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हालांकि सरकार की ओर से साफ किया गया है कि यह कोई प्रतिबंध या कानून नहीं है। लोग चाहें तो सोना खरीद सकते हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार चाहती है कि नागरिक आर्थिक जिम्मेदारी निभाएं और देश पर विदेशी मुद्रा का दबाव कम करने में सहयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी कम कर देते हैं, तो इससे भारत का गोल्ड इम्पोर्ट बिल घट सकता है और अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। वहीं विपक्ष इस अपील को सरकार की आर्थिक चिंता से जोड़कर देख रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि देश की जनता प्रधानमंत्री की इस अपील को किस रूप में लेती है—एक आर्थिक जिम्मेदारी के तौर पर या केवल एक सामान्य सलाह के रूप में।



