क्रिकेट से शुरू हो कर एथलेटिक्स का गढ़ बना मदन मोहन मालवीय स्टेडियम

Starting with cricket, Madan Mohan Malaviya Stadium has become a hub of athletics

प्रयागराज को तीर्थों का राजा कहा जाता है। यह तीर्थों के राजा नाम से तो जाना ही जाता है इसके साथ साथ महाकुंभ संग त्रिवेणी संगम और अपने एक लौते एथलेटिक्स स्टेडियम मदन मोहन मालवीय के लिए भी विश्वविख्यात है। यह वहीं ऐतिहासिक स्टेडियम जहां पर वर्ष 1987 में भारत और पाकिस्तान का दोस्ताना मैच खेला गया था। इसी स्टेडियम पर उस समय भारत के स्टार क्रिकेटर रहे सुनील गवास्कर को देखने के लिए प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। क्रिकेट और मल्टीपरपस खेल के से शुरू हुआ यह स्टेडियम वर्ष 2023-24 में सिंथेटिक ट्रैक बिछने के बाद से एथलेटिक्स के लिए एलाट कर दिया गया। सात मई को विश्व एथलेटिक्स दिवस के मौके पर आकााश त्रिपाठी की विशेष रिपोर्ट। इस मिट्टी की बात ही कुछ अलग है।

कहां क्रिकेट और मल्टीपरपस खेलों से एथलेटिक्स को समर्पित इस स्टेडियम में आज आलम यह है कि इस स्टेडियम पर अब तक दो राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताएं हो चुकी है। यह वहीं मैदान जहां से भारत के सर्वश्रेष्ठ रनर और थ्रोवर निकला करते थे और निकल रहे है। इस स्टेडियम में तीस खिलाड़ियों के रहने की व्यवस्था वाला छात्रावास है, जिसमे प्रवेश लेना हर खिलाड़ी का सपना होता है। जैसा की मदन मोहन मारलवीय स्टेडियम में डिप्टी स्पोट्स अफसर कोच देवी प्रसाद ने बताया कि यह छात्रावास वैसे, तो खिलाड़ियों को सात सालों के लिए आवंटित होता है, मगर खेल निदेशालय के अनुमोदन पर एक वर्ष का अतिरिक्त समय बढ़ सकता है।

इस छात्रावास में प्रवेश लेने के लिए खिलाड़ी को कम से कम एक राष्ट्रीय स्तर का खेल खेलना जरूरी है, वो चाहे स्कूल नेशनल हो या फिर चाहे जूनियर नेशनल खेला हो। इस छात्रावास ने अपने समय के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को तैयार किया जिसमे शॅाटपुट में रणविजय सिंह, हैमर थ्रो में चंद्रोदय नरायण का नाम उल्लेखनीय है। ऐसा नहीं इस स्टेडियम ने सिर्फ और सिर्फ थ्रोवर ही तैयार किये इस स्टेडियम ने राजेश पटेल और इरफान जैसे अंतराष्ट्रीय भाला फेक खिलाड़ियों को भी तैयार जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत संग अपने राज्य और जिले का नाम रोशन किया।

ही इस स्टेडियम ने कई बाधा दौड़ के खिलाड़ियों को तैयार किया जिनमे खेल की विधा में भारत का सर्वश्रेष्ठ सम्मान अर्जुन आवार्ड और पद्मश्री जैसे देश के प्रमुख सम्मानों से सम्मानित हो विश्व पटल पर स्टेडियम का नाम रोशन किया। इस मिट्टी ने महज खिलाड़ियों को तैयार ही नहीं किया, बल्कि इस काबिल बनाया कि वो अपने खेल के दम पर सरकारी नौकरी पा सके। अपने दमदार और शानदार खेल प्रदर्शन की बदौलत सरकारी नौकरी पाने वालों में हैमरथ्रोवर इश्तियाक अहमद और प्रमोद तिवारी का नाम उल्लेखनीय है। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकार ीप्रेम कुमार ने बताया कि इस स्टेडियम का सौदर्यीकरण कराने के साथ कई राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाएगा, ताकि स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को अपने खेल को प्रदर्शित करने संग परिपक्वता की ओर अग्रसर होने का मौका मिल सके।

Show More

Related Articles

Back to top button