
Thali cost India: जंग और महंगाई के दौर में जहां आम आदमी की जेब पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, वहीं एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोगों को थोड़ी राहत दी है। बढ़ती कीमतों के बीच अचानक थाली के सस्ता होने की खबर ने सबका ध्यान खींच लिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि महंगे तेल और टमाटर के बावजूद थाली के दाम काबू में रहे?
हाल ही में आई CRISIL की ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि मार्च 2026 में घर पर बनने वाली नॉन-वेज थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 1 प्रतिशत कम हो गई है, जबकि वेज थाली की कीमत लगभग स्थिर बनी रही। यह रिपोर्ट देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में खाद्य सामग्री की कीमतों के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आलू, प्याज और दाल की कीमतों में आई गिरावट ने टमाटर, वनस्पति तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर काफी हद तक कम कर दिया। मार्च महीने में आलू की कीमत करीब 13 प्रतिशत और प्याज की कीमत लगभग 25 प्रतिशत तक घट गई, जिससे थाली की कुल लागत पर नियंत्रण बना रहा।
हालांकि इस दौरान टमाटर की कीमतों में करीब 33 प्रतिशत, कुकिंग गैस में 14 प्रतिशत और खाने के तेल में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद सस्ती सब्जियों की वजह से थाली की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।
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वहीं नॉन-वेज थाली सस्ती होने की एक बड़ी वजह ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट भी रही। विशेषज्ञों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कम डिमांड और कुछ राज्यों में सप्लाई से जुड़े विवाद के चलते चिकन के दाम नीचे आए।
कुल मिलाकर, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव के इस दौर में आलू और प्याज ने आम आदमी की रसोई को बड़ी राहत दी है। अब आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
Written By: Kalpana Pandey



