West Bengal SIR controversy : ‘मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त’, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर कड़ी फटकार, CJI बोले- “हमें पता है किसकी हरकत”

West Bengal SIR controversy : मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार। CJI ने कहा- “हमें पता है किसकी हरकत”, ED ने I-PAC पर की छापेमारी।

West Bengal SIR controversy : सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का सुनियोजित प्रयास प्रतीत होती है।

अदालत ने कहा कि तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना न्यायपालिका के अधिकार को चुनौती देने जैसा है। कोर्ट ने इसे चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश बताते हुए राज्य प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि पश्चिम बंगाल अत्यधिक राजनीतिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त राज्य बन चुका है। उन्होंने टिप्पणी की, “हम जानते हैं कि यह किसकी हरकत है” और बताया कि वे खुद देर रात तक स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।

कोर्ट ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें मुख्य सचिव भी शामिल हैं, को फटकार लगाते हुए पूछा कि सूचना मिलने के बावजूद न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित क्यों नहीं निकाला गया। अदालत ने इस घटना को पूर्व नियोजित और प्रेरित बताते हुए इसे न्यायिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश करार दिया।

कोर्ट के बड़े निर्देश

  • भारत निर्वाचन आयोग को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने का निर्देश
  • न्यायिक अधिकारियों के आवास पर भी सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश
  • किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल सुरक्षा मूल्यांकन और कार्रवाई
  • सुनवाई के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए सख्त दिशा-निर्देश

ममता बनर्जी का बयान

मुर्शिदाबाद में रैली के दौरान ममता बनर्जी ने मालदा घटना से खुद को अलग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था अब उनके नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है और उनकी शक्तियां सीमित कर दी गई हैं। उन्होंने इसे “सुपर राष्ट्रपति शासन” जैसी स्थिति बताया।

ED की कार्रवाई: I-PAC पर छापेमारी

इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC से जुड़े अधिकारियों और अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी बताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, I-PAC के सह-संस्थापक ऋषि राज सिंह और अन्य पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली में तलाशी ली गई। इससे पहले भी एजेंसी I-PAC कार्यालय और इसके संस्थापक के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

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