UP MLC Election 2026: 53 हजार से ज्यादा वोट अवैध, UGC Roll Back संदेशों से गरमाई यूपी की सियासत

UP MLC Election 2026: विधान परिषद की 11 सीटों में BJP ने 6 और सपा ने 5 पर जीत दर्ज की; 53,615 मतपत्र अमान्य हुए, कुछ पर UGC के विरोध में संदेश लिखे मिलने की रिपोर्ट

UP MLC Election 2026:  उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव परिणामों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) के खाते में पांच सीटें गईं। इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा 53,615 अवैध मतपत्रों को लेकर हो रही है। कुछ मतपत्रों पर निर्धारित तरीके से वरीयता दर्ज करने के बजाय ‘UGC Roll Back’ जैसे संदेश लिखे मिलने की खबरें सामने आई हैं।

कुल 6,69,982 मतपत्रों में से 6,16,367 वैध पाए गए, जबकि 53,615 अमान्य घोषित हुए। इस तरह करीब 8 फीसदी मतपत्रों की गिनती नहीं हो सकी। अवैध मतों की इतनी बड़ी संख्या और UGC से जुड़े संदेशों की चर्चा ने राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने का मौका दिया है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने मतपत्रों पर UGC के विरोध में संदेश लिखे गए। इसलिए सभी अवैध मतों को किसी एक मुद्दे या राजनीतिक दल के खिलाफ नाराजगी का संकेत मानना उचित नहीं होगा।

11 सीटों पर 53,615 मतपत्र अमान्य, लखनऊ में सबसे ज्यादा

विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव में कुल 6,69,982 मतपत्र पड़े। इनमें 53,615 मतपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए और उन्हें अमान्य घोषित कर दिया गया।

सीटवार आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 11,233 मतपत्र अवैध रहे। इसके बाद वाराणसी स्नातक सीट पर 9,663 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 9,596 मतपत्र अमान्य घोषित किए गए।

अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मेरठ शिक्षक सीट पर 2,809, मेरठ स्नातक सीट पर 3,976, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर 2,800, आगरा शिक्षक सीट पर 2,128, आगरा स्नातक सीट पर 5,852, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर 3,183, लखनऊ शिक्षक सीट पर 936 और वाराणसी शिक्षक सीट पर 1,439 मतपत्र अमान्य पाए गए।

इन आंकड़ों के बीच UGC Roll Back लिखे कुछ मतपत्रों की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, ऐसे मतपत्रों की कुल संख्या और उन्हें लिखने वाले मतदाताओं की पहचान या राजनीतिक पसंद की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा अवैध मत

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला भी चर्चा में रहा। यहां BJP प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की, जबकि जीत और दूसरे स्थान के बीच अंतर महज 307 मतों का बताया गया। दूसरी ओर, इस सीट पर 2,800 मतपत्र अमान्य घोषित हुए।

अवैध मतपत्रों की संख्या जीत के अंतर से करीब नौ गुना अधिक थी। हालांकि, अमान्य मतों को किसी प्रत्याशी के खाते में जोड़कर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चुनाव का परिणाम बदल जाता। इन मतपत्रों से मतदाताओं की वास्तविक पसंद का पता नहीं चलता, क्योंकि वे निर्धारित मतदान प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे।

सपा ने चुनाव परिणामों को बताया सरकार के खिलाफ संदेश

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक वाजपेयी ने दावा किया कि विपक्ष का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर सीट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन का इस्तेमाल कर सपा प्रत्याशी को करीब 300 मतों से हरवाया। यह आरोप सपा प्रवक्ता का है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वाजपेयी ने UGC के मुद्दे पर भी BJP को घेरा। उनका कहना था कि पार्टी ने इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर लोगों को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जाएगा।

कांग्रेस ने युवाओं की नाराजगी से जोड़ा अवैध मतों का आंकड़ा

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने बड़ी संख्या में अवैध मतपत्रों को युवाओं और शिक्षित वर्ग की नाराजगी से जोड़कर देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने रोजगार के वादे किए, लेकिन युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिले।

अवस्थी ने शिक्षकों के खाली पदों, 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद और शिक्षामित्रों की समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि UGC से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने 53 हजार से अधिक अवैध मतों को सरकार के खिलाफ असंतोष का संकेत बताया। हालांकि, चुनावी आंकड़ों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि सभी अमान्य मतपत्र विरोध जताने के लिए ही डाले गए थे।

UGC Roll Back संदेशों पर क्या कह रहे हैं राजनीतिक विश्लेषक?

वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय के मुताबिक, 53 हजार से अधिक अवैध मतपत्रों का आंकड़ा राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय है। उन्होंने कुछ मतपत्रों पर UGC Roll Back जैसे संदेश लिखे होने की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे इस मुद्दे पर एक वर्ग की नाराजगी का संकेत मिल सकता है।

उनका मानना है कि BJP की चुनावी रणनीति में पिछड़े, दलित और सवर्ण मतदाताओं का समर्थन महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में यदि UGC के मुद्दे पर सवर्ण समाज के किसी हिस्से में असंतोष है, तो पार्टी को आगामी चुनावों से पहले इस पर संवाद करना पड़ सकता है।

विजय उपाध्याय ने लोकसभा चुनाव के दौरान क्षत्रिय समाज की नाराजगी से जुड़ी चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाए रखना BJP के लिए राजनीतिक चुनौती हो सकती है।

2027 से पहले BJP के सामने सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती?

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के अनुसार, विधान परिषद चुनाव में BJP ने छह सीटें जीतकर अपनी स्थिति बनाए रखी, लेकिन सपा की पांच सीटों पर जीत ने मुकाबले को रोचक बना दिया। खासकर लखनऊ और वाराणसी जैसी सीटों पर सपा की सफलता को उन्होंने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया।

शुक्ला का कहना है कि UGC के मुद्दे पर सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी की चर्चा को BJP नजरअंदाज नहीं कर सकती। उनके मुताबिक, पार्टी के सामने पिछड़े और दलित वर्गों के बीच अपना समर्थन बनाए रखने के साथ-साथ सवर्ण मतदाताओं से संवाद जारी रखने की चुनौती भी है।

उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामने सामाजिक समीकरणों को लेकर रणनीति बनाने की जरूरत होगी। यह उनका राजनीतिक आकलन है, चुनावी नतीजों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

क्या MLC चुनाव के नतीजे 2027 में भी असर दिखाएंगे?

विधान परिषद चुनाव के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। BJP ने छह सीटें जीतकर अपना प्रदर्शन बरकरार रखा, जबकि सपा ने पांच सीटें हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की।

UGC से जुड़े संदेशों और बड़ी संख्या में अमान्य मतपत्रों ने इस चुनाव को एक अतिरिक्त राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। विपक्ष इसे युवाओं और शिक्षित वर्ग की नाराजगी के रूप में पेश कर रहा है, जबकि इन मतपत्रों के पीछे की वास्तविक वजहों का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि MLC की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता समूह विधानसभा चुनाव के आम मतदाता वर्ग से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों के आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम तय मानना सही नहीं होगा। फिर भी UGC का मुद्दा, रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवाल तथा सामाजिक समीकरण आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति में चर्चा के विषय बने रह सकते हैं।

written by Siddhi Srivastav

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